धरसीवा,09 जुलाईं (आरएनएस)। रायपुर जिले के उरला क्षेत्र स्थित बेंद्री की 3डी इनोवेशन फैक्ट्री में हुए भीषण ब्लास्ट के बाद अब मुआवजा वितरण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि हादसे में जान गंवाने वाले मध्यप्रदेश के दो आदिवासी श्रमिकों के परिजनों को छत्तीसगढ़ के मृत श्रमिक की तुलना में कम मुआवजा दिया गया, जिससे भेदभाव के सवाल उठने लगे हैं।गौरतलब है कि 7 जुलाई की शाम फैक्ट्री में ऑक्सीजन सिलेंडर विस्फोट होने से तीन श्रमिकों की मौत हो गई थी। मृतकों में मध्यप्रदेश के मंडला जिले के लाल सिंह और कमल सिंह मरावी तथा छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के अरुण पांडे शामिल थे। हादसे के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए।घटना पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा था कि कंपनी प्रबंधन मृतकों के परिजनों को 30-30 लाख रुपये का मुआवजा देगा। आरोप है कि जांजगीर निवासी अरुण पांडे के परिजनों को 29 लाख रुपये का चेक और 1 लाख रुपये नकद देकर कुल 30 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया, जबकि दोनों आदिवासी श्रमिकों के परिवारों को केवल 20-20 लाख रुपये का चेक और 1-1 लाख रुपये नकद, यानी कुल 21-21 लाख रुपये ही दिए गए।मृतक कमल मरावी के पिता संभर सिंह मरावी ने बताया कि उनका बेटा परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था और उसके निधन से परिवार पर आर्थिक संकट आ गया है। उन्होंने बताया कि उन्हें 20 लाख रुपये का चेक और 1 लाख रुपये नकद मिला है।मुआवजे में कथित भेदभाव को लेकर बजरंग दल के नेता बीरेंद्र विश्वकर्मा ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार एक मृतक के परिजनों को 30 लाख रुपये दिए गए हैं, तो अन्य दोनों मृतकों के परिवारों को समान राशि क्यों नहीं दी गई।हालांकि, इन आरोपों पर फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मीडिया द्वारा संपर्क किए जाने पर भी प्रबंधन ने कोई जवाब नहीं दिया। फिलहाल मुआवजे में कथित असमानता को लेकर मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
०००
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

