– हिण्डौरा के किसानों की जंग हुई और तीखी
सीतापुर 10 अप्रैल (आरएनएस)। हिण्डौरा गांव में खड़ी गेहूं की फसल उजाड़े जाने का मामला अब भावनाओं और आक्रोश का बड़ा आंदोलन बन चुका है। एक महीने पहले जिन खेतों में सुनहरी बालियां लहलहा रही थीं, वहां प्रशासन ने ट्रैक्टर चलवा दिया। मुन्ना गुप्ता, मोनिका, अनामिका और शिवशंकर जैसे किसानों की मेहनत एक झटके में मिट्टी में मिला दी गई। आरोप है कि बिना ठोस जांच और स्पष्ट सूचना के जमीन को अवैध बताकर यह कार्रवाई की गई। इस अन्याय के खिलाफ किसानों का गुस्सा सड़क से होते हुए जिला मुख्यालय तक पहुंचा। डॉ. संदीप पाण्डेय के नेतृत्व में निकली पदयात्रा डीएम कार्यालय पर धरने में बदल गई। दरी बिछी, चूल्हे जले और संदेश साफ थाकृ अब लड़ाई लंबी चलेगी। प्रशासन के आश्वासन भी किसानों के जख्मों पर मरहम नहीं बन सके। एडीएम की अपील ठुकराते हुए किसानों ने दो टूक कहाकृअब हक लेकर ही उठेंगे। कई दौर की वार्ता बेनतीजा रही तो आंदोलन ने नया रूप ले लिया। न्यायालय जाने का निर्णय हुआ, लेकिन सवाल खड़ा हुआकृभूखे किसान मुकदमा कैसे लड़ेंगे? इसका जवाब भी उन्होंने अपने संघर्ष से दिया। सिधौली कस्बे में किसानों ने भीख मांगकर न्याय की लड़ाई के लिए चंदा जुटाना शुरू कर दिया। यह सिर्फ फसल उजडऩे की कहानी नहीं, बल्कि टूटती उम्मीदों और जिंदा हौसलों की दास्तान है। हिण्डौरा के किसान अब झुकने को तैयार नहींकृया तो न्याय मिलेगा, या यह संघर्ष और बड़ा होगा।
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