सेमिनार में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और 500 से अधिक विशेषज्ञों की भागीदारी, पारदर्शिता और सुशासन में कॉस्ट ऑडिट की भूमिका पर जोर
मुंबई, 11 अप्रैल (आरएनएस)। इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएमएआई) द्वारा यशवंतराव चव्हाण सेंटर, नरीमन पॉइंट, मुंबई में “”विकसित भारत के लिए कॉस्ट ऑडिट: वैल्यू, विश्वास और विजन” विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और पेशेवरों ने भाग लिया और देश की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में कॉस्ट ऑडिट की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए एक ऐसी अर्थव्यवस्था जरूरी है जो पारदर्शी, दक्ष, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ हो। उन्होंने कहा कि कॉस्ट ऑडिट को केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण उपकरण माना जाना चाहिए। यह विभिन्न क्षेत्रों में संसाधनों के सही उपयोग को सुनिश्चित करता है, अनावश्यक खर्च को कम करता है और कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करता है। राज्यपाल ने कहा कि आज के वैश्विक प्रतिस्पर्धा वाले दौर में गुणवत्ता के साथ लागत दक्षता भी उतनी ही जरूरी है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए लागत प्रतिस्पर्धा पर विशेष ध्यान देना होगा। आईसीएमएआई ने पेशेवर मानकों को मजबूत करने, बेहतर कार्यप्रणालियों को बढ़ावा देने और इस क्षेत्र में निरंतर सीखने की संस्कृति विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, संस्थान ने देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में पहुंच बढ़ाकर छात्रों के बीच कॉस्ट और मैनेजमेंट अकाउंटिंग में करियर के अवसरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
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