लालगंज (मीरजापुर)।रविवार को स्वर साम्राज्ञी आशा भोसले के निधन की खबर मिलते ही जिले भर में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीण अंचलों में विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं व राजनीतिक सेवकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अपनी स्मृतियां साझा कीं।
ग्रामीणों का कहना है कि उनके समय में फिल्मी गीत ही मनोरंजन का प्रमुख माध्यम थे। कस्बों के सिनेमा घरों और बाद में दूरदर्शन के जरिए उनके गीत घर-घर तक पहुंचे। उनके गीतों में जीवन के हर भाव की अभिव्यक्ति होती थी, जिससे लोग स्वयं को उनसे जुड़ा महसूस करते थे।
लहंगपुर में सामाजिक कार्यकर्ता बालेंदु मणि त्रिपाठी (6श वर्ष) ने कहा कि हम लोगों ने अपनी युवावस्था उनके गीतों के साथ बिताई है। उनकी आवाज में ऐसी मिठास थी जो आज भी मन को छू जाती है।राजनीतिक सेवक शशि भूषण दुबे 60 वर्ष ने कहा कि सिनेमा में जब उनका गीत आता था, तो पूरा माहौल बदल जाता था। उनकी आवाज में अलग ही आकर्षण था।सामाजिक कार्यकर्ता हरिशंकर मिश्रा (69 वर्ष) ने बताया कि उनके गीत हर खुशी और हर दुख के अवसर पर सुने जाते थे। आज वही गीत स्मृतियों में जीवित हैं।राजनीतिक सेवक जीवनलाल दुबे 68 वर्ष ने कहा कि उन्होंने अपने गायन से संगीत को नई दिशा दी। उनकी प्रतिभा हर तरह के गीतों में दिखाई देती थी।सामाजिक कार्यकर्ता चौधरी श्याम नारायण यादव (70 वर्ष) ने कहा कि हमारे समय के गीतों की आत्मा वही थीं। उनके गीत सुनते ही पुराने दिन याद आ जाते हैं।राजनीतिक सेवक महेंद्र तिवारी (69 वर्ष) ने कहा कि ऐसे कलाकार विरले ही जन्म लेते हैं। उनका जाना अपूरणीय क्षति है।जिले के विभिन्न हिस्सों में लोगों ने महान गायिका को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके निधन को एक युग का अंत बताया।
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