मैनहट्टन, 13 अपै्रल। ईरान युद्ध के आर्थिक असर से दुनियाभर में करीब 3.2 करोड़ लोग गरीबी में धकेले जा सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसका सबसे ज्यादा असर विकासशील देशों पर पड़ेगा। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब ईरान युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। एजेंसी ने इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका बताया है, जो कई देशों की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया ट्रिपल शॉक का सामना कर रही है, जिसमें ऊर्जा, खाद्य और आर्थिक विकास तीनों पर असर पड़ रहा है। बेल्जियम के पूर्व प्रधानमंत्री और यूएनडीपी प्रमुख अलेक्जेंडर डी क्रू ने कहा कि यह विकास का पीछे जाना जैसी स्थिति है। उनके अनुसार, युद्ध भले ही रुक जाए, लेकिन इसका असर लंबे समय तक रहेगा और गरीब देशों में लोग फिर से गरीबी की ओर धकेले जाएंगे।
युद्ध के बाद दुनियाभर में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से कीमतों में तेज उछाल आया है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक बाजार पर दबाव बढ़ा है। इसका असर उर्वरक और शिपिंग लागत पर भी पड़ा है, जिससे खाद्य संकट का खतरा बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी चेतावनी दी है कि यह संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ऐसे गहरे असर छोड़ेगा, जिनका नुकसान लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।
यूएनडीपी ने सुझाव दिया है कि सबसे गरीब लोगों की मदद के लिए करीब 6 अरब डॉलर (करीब 560 अरब रुपये) की जरूरत होगी, ताकि उन्हें गरीबी रेखा से नीचे जाने से रोका जा सके। इसके लिए नकद सहायता, सब्सिडी या वाउचर जैसे उपाय अपनाए जा सकते हैं। हालांकि, एजेंसी ने सभी के लिए सब्सिडी देने के खिलाफ चेतावनी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर हालात बिगड़े तो ज्यादा असर ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर होगा।
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