लखनऊ 16 अप्रैल (आरएनएस )। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश में बिजली व्यवस्था के निजीकरण और कर्मचारियों पर कथित उत्पीडऩ के विरोध में 15 अप्रैल से 21 मई 2026 तक जन-जागरण अभियान शुरू करने की घोषणा की है। समिति ने इसे “बिजली व्यवस्था बचाओ—कर्मचारी उत्पीडऩ बंद करो अभियान का नाम देते हुए प्रदेश भर में आमजन को जागरूक करने का निर्णय लिया है।समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के बिजली कर्मचारी, अभियंता और संविदा कर्मी उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा देने और बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन वर्तमान में कर्मचारियों पर बढ़ते दबाव, निजीकरण की नीतियों और कठोर प्रशासनिक निर्णयों के कारण असंतोष का माहौल है। इसी के विरोध में यह जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत विभिन्न जिलों में सभाएं, जनसंपर्क और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।संघर्ष समिति ने अपनी प्रमुख मांगों में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के निर्णय को वापस लेने को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है। इसके साथ ही ओबरा और अनपरा विद्युत परियोजनाओं को संयुक्त उद्यम के बजाय राज्य उत्पादन निगम को सौंपने, गंगा कैनाल जल विद्युत परियोजनाओं की लीज प्रक्रिया रद्द करने तथा ट्रांसमिशन क्षेत्र में निजीकरण की प्रक्रिया को बंद करने की मांग की गई है।समिति ने निजी कंपनियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग उठाई है। इसमें ग्रेटर नोएडा में संचालित निजी बिजली कंपनी का लाइसेंस रद्द करने तथा आगरा में टोरेंट पावर की फ्रेंचाइजी को उपभोक्ता शिकायतों और अनुबंध उल्लंघन के आधार पर समाप्त करने की मांग शामिल है। इसके अतिरिक्त 3 दिसंबर 2022 को ऊर्जा मंत्री और शासन स्तर पर हुए लिखित समझौते को तत्काल लागू करने की मांग भी दोहराई गई है।कर्मचारी संगठनों ने वर्ष 2023 के आंदोलन के बाद की गई अनुशासनात्मक कार्यवाहियों को समाप्त करने की मांग भी उठाई है। समिति के अनुसार मार्च 2023 की सांकेतिक हड़ताल के बाद कई कर्मचारियों के निलंबन, तबादले और विभागीय कार्रवाई की गई, जिन्हें वापस लिया जाना चाहिए। साथ ही निष्कासित संविदा कर्मियों की बहाली, आउटसोर्स कर्मियों को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम में समाहित करने और डाउनसाइजिंग के नाम पर हटाए गए कर्मियों को पुन: नियुक्त करने की मांग की गई है।समिति ने आंदोलन से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर और स्टेट विजिलेंस जांच समाप्त करने, निलंबित कर्मचारियों की सम्मानजनक बहाली करने तथा दूरदराज स्थानों पर किए गए तबादलों को रद्द करने की भी मांग रखी है। इसके अतिरिक्त सेवा नियमों में किए गए उन प्रावधानों को समाप्त करने की मांग की गई है, जिनके तहत बिना जांच और बिना सुनवाई के बर्खास्तगी का प्रावधान लागू किया गया है।संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि फेशियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन कटौती, विरोध सभाओं में भाग लेने पर तबादले, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अलग होने पर कार्रवाई और बिजली कर्मियों के आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाने जैसे कदम कर्मचारियों के उत्पीडऩ का कारण बन रहे हैं। समिति ने रियायती बिजली सुविधा समाप्त करने के प्रयासों को भी रोकने की मांग की है।समिति ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि यह संघर्ष केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि सस्ती और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने के अधिकार से जुड़ा मुद्दा है। उनका कहना है कि निजीकरण से बिजली दरों में वृद्धि और सेवा गुणवत्ता में गिरावट की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए आम नागरिकों से इस जन-जागरण अभियान में सहयोग करने का आह्वान किया गया है।संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान भी उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता पर किया जाएगा और बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बाधित नहीं होने दिया जाएगा। साथ ही यह भी कहा गया कि कर्मचारियों के हितों और बिजली व्यवस्था की मजबूती के लिए यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।
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