दुर्ग 16 अप्रैल (आरएनएस) साइबर ठगी का ऐसा संगठित नेटवर्क सामने आया है जिसने पुलिस को भी चौंका दिया, जहां आम लोगों के बैंक खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ बनाकर करोड़ों की ठगी का खेल खेला जा रहा था और जब दुर्ग पुलिस ने परतें खोलनी शुरू कीं तो 250 से ज्यादा संदिग्ध खातों में 1 करोड़ 88 लाख 67 हजार 554 रुपये के लेनदेन का बड़ा खुलासा हुआ, यह पूरा मामला 16 अप्रैल 2026 को थाना मोहन नगर और सुपेला क्षेत्र में सामने आया जहां भारत सरकार के गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल से मिली इनपुट के आधार पर पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और कर्नाटका बैंक स्टेशन रोड दुर्ग के 111 खातों तथा फेडरल बैंक दक्षिण गंगोत्री सुपेला के 105 खातों समेत कुल 250 खातों की बारीकी से पड़ताल की, जांच में साफ हुआ कि इन खातों का इस्तेमाल देशभर में हुई साइबर ठगी की रकम को रिसीव करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था, यानी एक पूरा नेटवर्क सक्रिय था जो भोले-भाले खाताधारकों या लालच में फंसे लोगों के अकाउंट का इस्तेमाल कर रहा था, पुलिस ने कार्रवाई तेज की, मुखबिर इनपुट, बैंक डिटेल और डिजिटल ट्रेल को जोड़ते हुए एक-एक कड़ी पकड़ी और आखिरकार 11 आरोपियों को दबोच लिया जिनमें शिवधर साहू (25) आर्य नगर कोहका भिलाई, गोविंदा डहरिया (26) कोहका भिलाई, साहिल टेम्बेकर (19) शंकर नगर दुर्ग, धर्मेन्द्र सिंह (27) वार्ड 24 दुर्ग, एस. त्रिमोला (29) खुर्सीपार भिलाई, प्रदीप कुमार उइके (38) रसमड़ा दुर्ग, भोजराज प्रजापति (44) कैम्प 02 भिलाई, हेमंत कुमार साहू (28) सुपेला भिलाई, सन्नी चौहान (25) सुपेला भिलाई, प्रिया सिंह (29) खुर्सीपार भिलाई और आरती मारकण्डे (26) कोहका भिलाई शामिल हैं, पुलिस ने इनके कब्जे से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और खातों से जुड़े अहम दस्तावेज जब्त किए, थाना मोहन नगर में अपराध क्रमांक 07/2025 और सुपेला में अपराध क्रमांक 32/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 317(2), 317(4), 318(4), 61(2)(क) के तहत केस दर्ज कर सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है, जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2026 के केवल चार महीनों में ही ऐसे मामलों में 150 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है जो इस गिरोह के फैलाव और गंभीरता को दर्शाता है, इस पूरी कार्रवाई में थाना सुपेला के थाना प्रभारी विजय यादव, उनि चितराम ठाकुर, प्र.आर. उपेन्द्र सिंह और आरक्षक सूर्य प्रताप सहित संयुक्त टीम की अहम भूमिका रही, पुलिस अब बाकी नेटवर्क और जुड़े खाताधारकों की तलाश में जुटी है, दुर्ग पुलिस ने आम लोगों को साफ चेतावनी दी है कि अपने बैंक खाते, एटीएम या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही आपको भी इस करोड़ों के साइबर जाल का हिस्सा बना सकती है, और याद रखें—डिजिटल दुनिया में सबसे बड़ी सुरक्षा आपकी जागरूकता ही है।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

