वॉशिंगटन,18 अपै्रल। अमेरिकी सांसदों और विशेषज्ञों ने हाल ही में आयोजित एक संसदीय सुनवाई के दौरान चेतावनी दी है कि चीन कानूनी खरीद और अवैध तस्करी के नेटवर्क के जरिए उन्नत अमेरिकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिप्स हासिल कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बढ़ता हुआ खतरा बन गई है.
चाइना सेलेक्ट कमेटी के अध्यक्ष जॉन मूलनार ने कांग्रेस की सुनवाई के दौरान कहा, चीन द्वारा उन्नत एआई चिप्स की तस्करी एक व्यापक खतरा है. उन्होंने पिछले एक साल में नाकाम किए गए कई मामलों का जिक्र किया. मूलनार ने न्याय विभाग के एक हालिया मामले का हवाला दिया, जिसमें लगभग 2.5 बिलियन मूल्य के चिप्स की तस्करी की गई थी. उन्होंने इसे अमेरिकी इतिहास में निर्यात नियंत्रण का अब तक का सबसे बड़ा उल्लंघन करार दिया.
सुनवाई के दौरान यह खुलासा हुआ कि तस्कर पकड़े जाने से बचने के लिए बेहद जटिल तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इनमें उपकरणों से सीरियल नंबर हटाना और प्रतिबंधित चिप्स को चीन भेजने के लिए फर्जी सर्वर शिपमेंट तैयार करना शामिल है. रिपोर्टों के अनुसार, सुपर माइक्रो कंप्यूटर के सह-संस्थापक वैली लियाओ का नाम भी इन प्रयासों से जुड़े संदिग्धों में शामिल है.
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ दिमित्री अल्पेरोविच ने समिति को बताया कि वर्तमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा पूरी तरह से कंप्यूटिंग पावर पर टिकी है. उन्होंने कहा, इस दौड़ में सबसे बड़ी बाधा प्रतिभा, डेटा या पैसा नहीं है… बल्कि यह सब कम्प्यूट पर आकर रुक जाता है. उनके अनुसार, चीन निर्यात नियंत्रणों को दरकिनार करने के लिए विदेशी डेटा केंद्रों का निर्माण कर रहा है और भारी मात्रा में चिप्स की तस्करी कर रहा है.
विशेषज्ञ यूसुफ महमूद ने चेतावनी दी कि चीन का लक्ष्य 2030 तक एआई के क्षेत्र में पूर्ण वर्चस्व हासिल करना है. इसके लिए वह डिस्टिलेशन अटैक जैसे साइबर हमलों का उपयोग कर रहा है ताकि अमेरिकी एआई प्रणालियों की नकल की जा सके. उन्होंने आगाह किया कि यदि इन चोरी की गई तकनीकों को नहीं रोका गया, तो इनका उपयोग युद्ध के मैदान में अमेरिकी हितों के खिलाफ किया जा सकता है.
सुनवाई में यह बात स्पष्ट हुई कि अमेरिका वर्तमान में अपनी तकनीकी बढ़त बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है. हालांकि निर्यात नियंत्रणों ने कुछ समय जरूर खरीदा है, लेकिन चीन द्वारा बनाई जा रही फुल-स्टैक इकोसिस्टम की योजना अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती है. अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि तकनीकी नेतृत्व बनाए रखना न केवल आर्थिक प्रभुत्व के लिए, बल्कि सैन्य और रणनीतिक बढ़त के लिए भी अनिवार्य है.
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