सियोल,27 मई। उत्तर कोरिया ने दावा किया है कि उसने अपने हालिया हथियार परीक्षणों में कई नई सैन्य तकनीकों और हथियार प्रणालियों का परीक्षण किया है, जिनमें परमाणु क्षमता वाली क्रूज मिसाइल और नए वॉरहेड शामिल हैं। यह जानकारी बुधवार को उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया के हवाले से सामने आई। नॉर्थ कोरिया के मुताबिक, इन परीक्षणों की निगरानी देश के नेता किम जोंग उन ने खुद की। इन परीक्षणों में बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम शामिल थे।
रिपोर्ट के अनुसार, किम जोंग उन ने इन परीक्षणों पर संतोष जताया, खासकर क्रूज मिसाइल सिस्टम के प्रदर्शन को लेकर। ये मिसाइलें दक्षिण कोरिया की सीमा के पास तैनात लंबी दूरी की आर्टिलरी इकाइयों के साथ इस्तेमाल के लिए तैयार की जा रही हैं। किम ने सैन्य अधिकारियों से कहा कि आर्टिलरी बलों को तेजी से आधुनिक बनाया जाए ताकि कोई भी उनकी बराबरी न कर सके।
दक्षिण कोरिया की सेना ने एक दिन पहले बताया था कि उत्तर कोरिया ने अपने पश्चिमी समुद्री क्षेत्र की ओर कई प्रोजेक्टाइल दागे, जिनमें कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल भी शामिल थी। दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अनुसार, यह मिसाइल करीब 80 किलोमीटर तक गई, हालांकि अन्य हथियारों के प्रकारों की पुष्टि नहीं की गई थी। दक्षिण कोरिया की सेना ने उत्तर कोरिया के नए दावों पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
उत्तर कोरिया लगातार अपनी सैन्य क्षमता को आधुनिक और मजबूत बनाने में लगा हुआ है, खासकर तब से जब 2019 में उसके और अमेरिका के बीच बातचीत टूट गई थी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ कूटनीतिक बातचीत विफल होने के बाद किम जोंग उन ने हथियार कार्यक्रम तेज कर दिया है। उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया को अपना सबसे बड़ा दुश्मन भी घोषित किया है और दोनों देशों के बीच पुराने संबंधों को लगभग खत्म कर दिया है। हाल ही में एक सैन्य बैठक में किम ने सीमा पर तैनात सैनिकों की ताकत बढ़ाने पर चर्चा की थी और कहा था कि सीमा को अभेद्य किले में बदला जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, किम जोंग उन की विदेश नीति अब रूस की ओर ज्यादा झुकती दिख रही है। रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए उत्तर कोरिया से हजारों सैनिक और हथियार मिल रहे हैं। इसके साथ ही उत्तर कोरिया ने चीन के साथ भी संबंध मजबूत किए हैं, जिसे वह अपना मुख्य सहयोगी और आर्थिक सहारा मानता है। वहीं, ट्रंप ने कई बार किम जोंग उन के साथ बातचीत फिर से शुरू करने की इच्छा जताई है। लेकिन उत्तर कोरिया ने इन प्रस्तावों को नजरअंदाज कर दिया है। प्योंगयांग का कहना है कि जब तक अमेरिका परमाणु निरस्त्रीकरण की शर्त नहीं हटाता, तब तक किसी भी बातचीत की संभावना नहीं है।
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