नईदिल्ली,19 अपै्रल (आरएनएस)। महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर संसद में लाया विधेयक पारित नहीं हो सका है। विधेयक को जरूरी दो तिहाई वोट नहीं मिल सके। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण दिलाने का भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का संकल्प अडिग रहेगा। उन्होंने कहा कि विधेयक भले गिर गया, लेकिन वे हारे नहीं है। इसके बाद सरकार की अगली रणनीति को लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं।
सूत्रों ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार अगले लोकसभा चुनावों में महिला आरक्षण लागू करने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों के साथ चर्चा कर सकती है और अगर जरूरत पड़ी तो संसद के मानसून सत्र के दौरान इस विधेयक को दोबारा पेश करने पर भी विचार कर सकती है। सरकार ने 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक गिरने के बावजूद सरकार ने बाकी 2 विधेयकों को वापस नहीं लिया है।
सरकार ने जिन 2 विधेयकों को वापस नहीं लिया है, उन्हें कभी भी पेश कर मतदान कराया जा सकता है। दूसरी ओर, 2023 में पारित हुआ ‘नारी शक्ति वंदन विधेयक’ अब कानून बन चुका है। यानी 2029 के लोकसभा चुनावों में महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ है। हालांकि, इस कानून में महिला आरक्षण लागू करने से पहले जनगणना कराने और उस आधार पर परिसीमन की शर्तें हैं।
एक विकल्प ये है कि सरकार जनगणना और परिसीमन के काम को तेजी से करे। जनगणना अभी चल रही है। अगर इसके फौरन बाद परिसीमन आयोग गठित किया जाए और वो निर्धारित समयसीमा में अपना काम पूरा कर ले तो संभव है कि 2029 के चुनावों में महिलाओं का आरक्षण मिल जाए। दूसरा विकल्प यह है कि सीटों की संख्या बढ़ाए बिना केवल निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव कर परिसीमन किया जाए, जिसका राजनीतिक विरोध कम होगा।
सरकार के पास एक विकल्प ये भी है कि अनुच्छेद 334ए में संशोधन कर आरक्षण के प्रावधान को परिसीमन की शर्त से अलग किया जा सकता है। इससे मौजूदा लोकसभा सीटों पर आरक्षण लागू करना संभव हो जाएगा। फिलहाल, 2026 तक परिसीमन पर रोक लगी हुई है। सरकार फिलहाल इस मुद्दे का इस्तेमाल विपक्ष को महिला विरोधी घोषित करने में कर रही है। माना जा रहा है कि इससे पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनावी फायदा हो सकता है।
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