लखनऊ 19 अप्रैल (आरएनएस )। जनपद लखनऊ में भूमि अभिलेखों की पारदर्शिता, सुलभता एवं सुशासन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिलाधिकारी लखनऊ के निर्देशन में लखनऊ भूलेख (द्यह्वष्द्मठ्ठश2ड्ढद्धह्वद्यद्गद्मद्ध.द्बठ्ठ) पोर्टल का शुभारंभ 15 अप्रैल 2026 से कर दिया गया है। इस डिजिटल व्यवस्था के लागू होने से अब नागरिकों को राजस्व अभिलेख प्राप्त करने के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और वे घर बैठे ही आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कर सकेंगे।इस पोर्टल के माध्यम से अब नागरिक खसरा, खतौनी, चकबंदी सहित अन्य राजस्व अभिलेखों का ऑनलाइन अवलोकन कर सकेंगे। साथ ही डिजिटल हस्ताक्षर युक्त प्रमाणित प्रतियों के लिए भी ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। प्रशासन द्वारा जारी की गई ये प्रमाणित प्रतियाँ न्यायालय, बैंक एवं अन्य शासकीय कार्यों में पूर्ण रूप से मान्य होंगी, जिससे नागरिकों को विभिन्न कार्यों में सुविधा मिलेगी।इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत जनपद लखनऊ के कुल 898 ग्रामों के भूमि अभिलेख पोर्टल पर उपलब्ध कराए गए हैं। अब तक कुल 11,049 अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है, जिनमें लगभग 22,51,696 अभिलेख पृष्ठ शामिल हैं। इस व्यापक डिजिटलीकरण से अभिलेखों का सुरक्षित संरक्षण सुनिश्चित हुआ है तथा आवश्यक जानकारी को कम समय में उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत हुई है।प्रशासन द्वारा 15 अप्रैल 2026 से यह व्यवस्था भी लागू कर दी गई है कि डिजिटाइज किए गए अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां अब केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही जारी की जाएंगी। इसके साथ ही इन अभिलेखों की भौतिक प्रतियां जारी करने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है, जिससे पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और डिजिटल बनाया जा सके।पोर्टल में नागरिकों की सुविधा के लिए विस्तृत मास्टर डेटा मॉड्यूल भी जोड़ा गया है, जिसमें तहसीलों, परगनों, ग्रामों तथा उनके राजस्व मानचित्रण से संबंधित समेकित जानकारी उपलब्ध कराई गई है। नागरिक अब तहसीलवार, परगनावार तथा तहसील-परगना के संयोजन के आधार पर ग्रामों की सूची आसानी से देख सकेंगे। इसके अतिरिक्त तहसीलवार लेखपालों की सूची और उनकी तैनाती का विवरण भी पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है, जिससे आमजन को संबंधित राजस्व कर्मियों की जानकारी प्राप्त करने में सुविधा होगी।इस पोर्टल के माध्यम से आवेदन की स्थिति की वास्तविक समय में जानकारी, पारदर्शी प्रक्रिया तथा न्यूनतम समय में सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह पहल प्रशासन की डिजिटल गवर्नेंस और नागरिक-केंद्रित सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है तथा भविष्य में राजस्व सेवाओं को और अधिक सरल एवं प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगी।इस परियोजना का तकनीकी विकास राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी), लखनऊ जिला इकाई द्वारा किया गया है, जबकि इसका संचालन जिलाधिकारी लखनऊ के निर्देशन में किया जा रहा है। प्रशासन ने जनसामान्य से अपील की है कि भूमि अभिलेखों एवं प्रमाणित प्रतियों के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल द्यह्वष्द्मठ्ठश2ड्ढद्धह्वद्यद्गद्मद्ध.द्बठ्ठ का ही उपयोग करें और किसी भी प्रकार की भ्रामक या फर्जी वेबसाइटों से सतर्क रहें।
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