लखनऊ 19 अप्रैल (आरएनएस )। राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी एवं प्रदेश कांग्रेस विधान मंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर प्रधानमंत्री पर तीखा हमला बोला है। दोनों नेताओं ने रविवार को संयुक्त रूप से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक के नाम पर संविधान संशोधन का प्रयास देश की जनता के साथ छल और धोखा है तथा इसे राजनीतिक ड्रामा करार दिया।सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री को महिलाओं को न्याय दिलाने की इतनी चिंता है तो उन्हें देश को यह बताना चाहिए कि भारतीय जनता पार्टी किसी महिला को प्रधानमंत्री क्यों नहीं बना पा रही है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि महिलाओं के प्रति वास्तविक सम्मान है तो स्पीकर, पार्टी अध्यक्ष और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर किसी सक्षम महिला को अवसर दिया जाना चाहिए।उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण विधेयक के नाम पर देश की जनता को गुमराह किया गया है और इस मुद्दे पर भाजपा की नीति और नीयत दोनों ही सही नहीं रही हैं। प्रमोद तिवारी ने सवाल उठाया कि महिला आरक्षण विधेयक की आड़ में परिसीमन संशोधन का प्रस्ताव लाने से पहले सरकार ने संसद सत्र से पूर्व सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुलाई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की बात कही जा रही है, जबकि विधेयक में इस संबंध में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।प्रमोद तिवारी ने कहा कि वर्ष 2023 में महिला आरक्षण विधेयक को कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष के समर्थन से पारित कराया गया था, लेकिन तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद इसे लागू नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि संविधान को समझने वाला हर नागरिक आज विपक्ष का आभारी है, जिसने संविधान संशोधन के माध्यम से सत्ता में बने रहने के प्रयासों को विफल किया है। उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन संशोधन के माध्यम से केंद्र सरकार संघीय ढांचे को कमजोर करने का प्रयास कर रही थी।उन्होंने आरोप लगाया कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए महिला आरक्षण विधेयक के नाम पर राजनीतिक स्टंट किया गया है।वहीं प्रदेश कांग्रेस विधान मंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि विपक्ष ने एकजुट होकर संविधान की रक्षा का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को उत्तर प्रदेश की महिलाओं से तत्काल क्षमा मांगनी चाहिए। उन्होंने उन्नाव और हाथरस की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों में पीडि़ताओं को समय पर न्याय दिलाने में सरकार विफल रही है, जिसके लिए प्रधानमंत्री को जवाब देना चाहिए।
आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री की मंशा साफ होती तो वर्ष 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक को अब तक लागू किया जा चुका होता। उन्होंने कहा कि यदि यह कानून लागू होता तो आज संसद और कई विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अधिक मजबूत दिखाई देता।उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने पंचायत स्तर पर महिलाओं को आरक्षण देने का कानून प्रस्तुत किया था, जिसका उस समय भाजपा ने विरोध किया था। विपक्षी गठबंधन को लेकर प्रधानमंत्री की बयानबाजी पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि बैसाखियों के सहारे चल रही सरकार को इस प्रकार के बयान देने से बचना चाहिए, क्योंकि यह प्रधानमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
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