खुले बाजार में गाइड और रिफरेंस बुक बिकेगी, कॉलेज परिसर में अनुमति नहीं
प्रयागराज 19 अप्रैल (आरएनएस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेसर्स चित्रा प्रकाशन प्रा लि को हाईस्कूल-इंटरमीडिएट कक्षाओं के छात्रों के लिए गाइड व रिफरेंस बुक की खुले बाजार में बेचने की अनुमति दे दी है और कहा है कि याची के इस काम में माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव द्वारा 23 फरवरी 26 व 4 अप्रैल 26 को जारी परिपत्र आड़े नहीं आयेगा।
माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज द्वारा जारी परिपत्र के विरुद्ध दाखिल रिट याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई, जिसमें न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं एवं प्रतिवादियों दोनों पक्षों की दलीलों को गंभीरता से सुना।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत किया गया कि वे पुस्तक प्रकाशन एवं विक्रय के व्यवसाय से जुड़े हैं तथा उनकी पुस्तकें खुले बाजार में गाइड एवं संदर्भ पुस्तकों के रूप में बेची जाती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(द्द) के अंतर्गत उन्हें व्यापार करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है और वे सभी वैधानिक नियमों का पालन कर रहे हैं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज द्वारा 23 फरवरी 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति/परिपत्र उनके व्यवसाय में अनावश्यक हस्तक्षेप करते हुए अवैध रूप से बाधा उत्पन्न कर रहा है।
वहीं, प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता शुभ्रांशु शेखर सिंह ने न्यायालय को अवगत कराया कि परिषद का उद्देश्य याचिकाकर्ताओं को खुले बाजार में पुस्तकें बेचने से रोकना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिषद की चिंता केवल छात्र हित में यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल परिसरों के भीतर पुस्तक विक्रय न हो। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि परिषद इस संबंध में आवश्यक आश्वासन (अंडरटेकिंग) देने को तैयार है कि संबंधित परिपत्र खुले बाजार में बिक्री को प्रभावित नहीं करेंगे।
न्यायालय ने इस दौरान यह भी पाया कि पूर्व में दाखिल हलफनामा अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत तर्कों के अनुरूप नहीं था। आज पुन: एक नया हलफनामा प्रस्तुत किया गया, जिसे न्यायालय ने अभिलेख पर स्वीकार किया। हालांकि, हलफनामे का अवलोकन करने के पश्चात न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि यह न तो न्यायालय के आदेश की भावना के अनुरूप है और न ही प्रतिवादी पक्ष द्वारा प्रस्तुत दलीलों के अनुरूप। प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ताओं के पक्ष को मजबूत मानते हुए न्यायालय ने उन्हें अंतरिम राहत प्रदान की। न्यायालय ने प्रतिवादी पक्ष को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, जबकि याचिकाकर्ता उसके तीन दिन के भीतर प्रत्युत्तर प्रस्तुत कर सकेंगे।
मामले की अगली सुनवाई 05 मई 2026 को प्रथम वाद के रूप में निर्धारित की गई है। अंतरिम आदेश में न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता खुले बाजार में अपनी पुस्तकें बेच सकते हैं तथा 23.02.2026 की प्रेस विज्ञप्ति एवं 04.04.2026 के परिपत्र उनके इस अधिकार में बाधा नहीं बनेंगे। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि याचिकाकर्ता प्रतिवादी संस्थाओं के नियंत्रण वाले किसी भी शैक्षणिक परिसर के भीतर पुस्तक विक्रय नहीं करेंगे।
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