लखनऊ 21 अप्रैल (आरएनएस)। पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ द्वारा बाल संरक्षण एवं महिलाओं को उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला रिजर्व पुलिस लाइन स्थित संगोष्ठी सदन में बाल संरक्षण एवं वन स्टॉप सेंटर सेवाओं विषय पर आयोजित की गई।यह कार्यक्रम संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) अपर्णा कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बबलू कुमार तथा पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) अमित कुमावत के प्रभावी मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यशाला का संचालन सहायक पुलिस आयुक्त (महिला अपराध/ट्रेनिंग सेल) सौम्या पाण्डेय के पर्यवेक्षण में किया गया।प्रशिक्षण कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य अपराध से पीडि़त बालकों एवं महिलाओं को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं के संबंध में पुलिस कर्मियों को जागरूक और दक्ष बनाना था। इसके माध्यम से पुलिस एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करते हुए पीडि़तों को त्वरित, प्रभावी और संवेदनशील सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करने पर जोर दिया गया।कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के विभिन्न थाना क्षेत्रों से नामित 39 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी प्रतिभागी के रूप में शामिल हुए। प्रशिक्षण सत्र विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा संचालित किए गए, जिनमें व्यवहारिक एवं तकनीकी दोनों पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।प्रशिक्षण सत्र में बाल संरक्षण अधिकारी सूर्यकांत चौरसिया द्वारा किशोर न्याय (जेजे) एक्ट के विभिन्न प्रावधानों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (सीडब्ल्यूपीओ) के कर्तव्यों एवं जिम्मेदारियों पर विशेष प्रकाश डाला तथा बाल अपचारी के प्रति अपनाई जाने वाली विधिक प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। साथ ही चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की भूमिका, कार्यप्रणाली और बाल संरक्षण में उसकी महत्वपूर्ण भागीदारी के बारे में भी प्रतिभागियों को अवगत कराया गया।प्रशिक्षण के दौरान सोशल बैकग्राउंड रिपोर्ट की आवश्यकता, उसके निर्माण एवं उपयोगिता पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि अपराध से पीडि़त बालकों को पुलिस, बाल संरक्षण इकाइयों तथा अन्य विभागों के समन्वय से आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके साथ ही वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से महिलाओं एवं बालिकाओं को चिकित्सा, कानूनी, मनोवैज्ञानिक सहायता तथा अस्थायी आश्रय जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराए जाने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई।कार्यशाला में विभिन्न केस स्टडी और उदाहरणों के माध्यम से यह बताया गया कि समन्वित प्रयासों से पीडि़तों को बेहतर सहायता प्रदान की जा सकती है। प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करने के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया। साथ ही यह भी बल दिया गया कि संवेदनशील मामलों में पुलिसकर्मी सहानुभूतिपूर्ण और जिम्मेदार व्यवहार अपनाएं, जिससे पीडि़तों को विश्वास और सुरक्षा का अनुभव हो सके।पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ ने बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाएंगे, ताकि पुलिसिंग व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, प्रभावी और जनोन्मुख बनाया जा सके। अधिकारियों के अनुसार यह प्रशिक्षण कार्यशाला पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी तथा इससे पीडि़तों को त्वरित और समुचित सहायता उपलब्ध कराने के साथ न्याय प्रक्रिया को भी अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायता मिलेगी।
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