श्रीनगर,22 अपै्रल (आरएनएस)। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को एक साल हो गया है। इस हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की जान गई थी। इस हमले की जांच का दायरा स्थानीय स्तर से शुरू होकर सीमा पार तक पहुंच गया है। भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए मामले की जांच में जुटी है, जिसने हमले में लश्कर और उसके सहयोगी संगठनों की भूमिका को लेकर सबूत दिए हैं।
गृह मंत्रालय के आदेश पर 27 अप्रैल को एनआईए ने आधिकारिक तौर पर जांच अपने हाथ में ली थी। हालांकि, इससे पहले ही एनआईए की टीम घटनास्थल पर पहुंच गई थी और सबूत जुटाने में लगी थी। एनआईए ने बैसरन घाटी में घटनास्थल की फॉरेंसिक जांच और डिजिटल मैपिंग कराई। खून से सने कपड़ों और धब्बों की डीएनए जांच कराई गई। मौके पर पड़े खाली कारतूसों को जब्त किया गया और मोबाइल डेटा की जांच की गई।
एनआईए ने इस हमले में मारे गए लोगों के परिजनों, खच्चर वाले, फोटोग्राफर, दुकानदार, होटल वाले और स्थानीय लोगों समेत 3,000 से ज्यादा लोगों से 1,000 घंटे से ज्यादा पूछताछ की। पहलगाम में लगे कैमरों के फुटेज को खंगाला गया, बैसरन घाटी से निकलने वाले करीब 58 रास्तों के एंट्री और एक्जिट प्वाइंट को चेक किया गया। एनआईए ने शुरुआती एक महीने में ओवरग्राउंड वर्कर्स समेत 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया।
24 अप्रैल को अनंतनाग पुलिस ने 3 आतंकियों के स्कैच जारी किए। इनके नाम आदिल हुसैन ठोकर, हाशिम मूसा उर्फ सुलेमान और अली उर्फ तल्हा भाई थे। इनके बारे में सूचना देने वालों को 20-20 लाख रुपये इनाम देने की घोषणा की गई। इसी दौरान एक फोटो भी सामने आया, जिसमें 4 आतंकी जंगल में राइफल लिए खड़े हैं। इसमें इन तीनों आतंकियों के अलावा जुनैद अहमद भट्ट भी था।
22 जून, 2025 को एनआईए को बड़ी कामयाबी मिली। तब एजेंसी ने बशीर अहमद और उसके भाई परवेज अहमद को गिरफ्तार किया। दोनों ने बताया कि पहलगाम हमले के तीनों आतंकी 21 अप्रैल 2025 की रात करीब 8 बजे बैसरन से 2 किलोमीटर दूर परवेज की ढोंक में आए थे। इन्होंने ये भी बताया कि आतंकियों के पास राइफल थी और 2 आतंकियों ने काले कपड़े पहने थे। दोनों से एनआईए को आतंकियों के बारे में कई अहम जानकारियां मिलीं।
एक तरफ एनआईए जांच में जुटी थी, तो दूसरी तरफ भारतीय सेना ने आतंकियों को घेरने के लिए ऑपरेशन महादेव शुरू किया। लगातार दक्षिणी कश्मीर के दुर्गम जंगलों में तलाशी अभियान चलाया गया। शुरुआत में यह अभियान 300 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा इलाके में फैला हुआ था, लेकिन लगातार निगरानी और सेना की सटीक तैनाती की वजह से दायरा छोटा होता गया। आखिरकार 29 जुलाई को सेना ने सुलेमान उर्फ फैजल जट्ट, अफगान और जिब्रान को मार गिराया।
एनआईए ने दिसंबर, 2025 में 1,597 पन्नों का आरोप पत्र दायर किया। इसमें मारे गए 3 आतंकियों समेत 7 आतंकियों को आरोपी बनाया गया। इनमें सैफुल्लाह साजिद जट्ट का भी नाम शामिल है, जो लश्कर में हाफिज सईद के बाद तीसरे नंबर का नेता है। एनआईए ने कहा कि ये घटना पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की व्यापक और समन्वित आतंकी रणनीति का हिस्सा थी। एनआईए फिलहाल व्यापक आतंकी नेटवर्क को लेकर जांच कर रही है।
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