वाशिंगटन, 24 अपै्रल। ईरान के साथ युद्ध के चलते अमेरिका के पास हथियार कम होने लगे हैं। अमेरिकी सेना के कुछ सबसे अहम मिसाइल भंडार तेजी से कम हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अगले कुछ सालों में फिर संघर्ष छिड़ा तो संभवत: अमेरिका को हथियारों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। पेंटागन के अंदरूनी अनुमान के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने हजारों की संख्या में हथियार इस्तेमाल कर लिए हैं, जिनमें टॉमहॉक और पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं।
सूत्रों ने रक्षा विभाग के अनुमानों के हवाले से बताया कि अमेरिकी सेना ने लगभग 1,100 जॉइंट एयर-टू-सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइल-एक्सटेंडेड रेंज दाग दी हैं। अमेरिका के पास अब इस तरह की केवल 400 मिसाइलें बची हैं। इसके अलावा 1,000 से ज्यादा टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया जा चुका है। ये अमेरिका द्वारा हर साल खरीदी जाने वाली टॉमहॉक मिसाइलों की संख्या का 10 गुना से भी ज्यादा है। अब 3,000 टॉमहॉक मिसाइलें बची हुई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने युद्ध में 1,200 से ज्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें भी दागी हैं। इनमें से हर एक की कीमत करीब 37 करोड़ रुपये है। अमेरिका ने पूरे 2025 में सिर्फ 600 पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें बनाई थीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी सेनाओं ने 1,000 से ज्यादा प्रिसिजन स्ट्राइक और एटीएसीएमएस जमीन-आधारित मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया है, जिससे उनका भंडार चिंताजनक रूप से कम हो गया है।
सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 7 हफ्ते तक चले ईरान युद्ध में अमेरिकी सेना ने अपनी प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइलों का कम से कम 45 प्रतिशत भंडार इस्तेमाल कर लिया है। इसके अलावा थाड मिसाइल भंडार और पैट्रियट एयर डिफेंस इंटरसेप्टर्स का का लगभग आधा हिस्सा इस्तेमाल किया जा चुका है। 1,100 स्टील्थ क्रूज मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया जा चुका है, जिन्हें चीन के साथ संभावित युद्ध के लिए बनाया गया था।
ईरान युद्ध के चलते अमेरिका ने एशिया और यूरोप में मौजूद अपने हथियारों को पश्चिम एशिया भेजा है। इससे दूसरे केंद्र रूस और चीन जैसे विरोधियों के साथ संभावित टकराव के लिए कमजोर हो गए हैं। इस युद्ध ने अमेरिका की ज्यादा महंगी मिसाइलों और गोला-बारूद पर अत्यधिक निर्भरता को भी उजागर किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के पास मौजूद गोला-बारूद का भंडार चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी का सामना करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
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