भोपाल 27 अप्रैल (आरएनएस)। कांग्रेस विधायक झूमा सोलंकी ने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदनÓ अधिनियम में यह स्पष्ट है कि इसे परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार संसद में बिल तो लाती है, लेकिन एक शर्त जोड़कर महिलाओं को पीछे कर देती है, जिससे उसकी नीयत साफ नजर आती है।
उन्होंने कहा कि अगर बहनों-बेटियों को आगे बढ़ाना है तो उन्हें भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए और सत्ता में बने रहने के लिए ऐसी रणनीति नहीं अपनानी चाहिए।
सोलंकी ने कहा कि देश की जनसंख्या के आधार पर पहले गणना, फिर परिसीमन और उसके बाद आरक्षण लागू होगा, जो एक लंबी प्रक्रिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या महिलाओं को इतने लंबे इंतजार के बाद अवसर देना न्यायसंगत है।
उन्होंने कहा कि केंद्र में एक दशक और मध्य प्रदेश में दो दशक से अधिक समय से बीजेपी की सरकार है, इसके बावजूद आरक्षण लागू नहीं किया गया। साथ ही उन्होंने राजीव गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि पंचायती राज में महिलाओं को आरक्षण देने की पहल कांग्रेस ने की थी।
कांग्रेस विधायक झूमा सोलंकी ने कहा कि वर्तमान सीटों पर ही महिलाओं को आरक्षण दिया जाए, ताकि वे अपनी भागीदारी निभा सकें। उन्होंने कहा कि इस तरह फैसलों को टालना महिलाओं के साथ न्याय नहीं है।
उन्होंने मांग की कि अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए भी “कोटे के भीतर कोटा” का प्रावधान किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि सशक्त नारी से ही सशक्त परिवार और देश बनता है।
सोलंकी ने स्वामी विवेकानंद का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कहा था—एक तरफ 500 पुरुष खड़े हों और दूसरी तरफ 20 महिलाएं साथ खड़ी हो जाएं, तो देश बदला जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जनगणना और परिसीमन जैसी लंबी प्रक्रिया का इंतजार महिलाओं से नहीं कराया जाना चाहिए। वर्तमान लोकसभा और विधानसभा की स्थिति के आधार पर ही तुरंत आरक्षण लागू किया जाना चाहिए।

