हरिद्वार,27 अपै्रल (आरएनएस)। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में सोमवार को पंचकर्म एवं वैकल्पिक चिकित्सा विषय पर सात दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति प्रो. पांडेय ने किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। नाड़ी विज्ञान एवं वैकल्पिक चिकित्सा पर यहां गुणवत्तापूर्ण कार्य किया जा रहा है और आधुनिक प्रयोगशालाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने अन्य विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को भी इन सुविधाओं का लाभ लेने का आह्वान किया। वित्त नियंत्रक लखेंद्र गोथियाल ने कहा कि विश्वविद्यालय शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं, कुलसचिव दिनेश कुमार ने भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम संयोजक प्रो. लक्ष्मीनारायण जोशी ने बताया कि यह कार्यशाला प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है, जिसमें विद्यार्थियों को पंचकर्म, प्राकृतिक चिकित्सा, प्राण चिकित्सा, कप थेरेपी एवं नाड़ी विज्ञान का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। हिमाचल से आई शिक्षिका डॉ. अर्पिता नेगी ने बताया कि प्रतिभागी छात्र प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने क्षेत्रों में वैकल्पिक चिकित्सा के प्रचार-प्रसार में योगदान देंगे। डॉ. कामख्या कुमार ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से आए छात्र-छात्राओं ने भी कार्यशाला में प्रतिभाग किया।
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