अजय दीक्षित
पश्चिम बंगाल में मतदाताओं ने भारतीय राजनीतिक इतिहास में पहली बार 92.55 फीसदी वोट करके रिकॉर्ड कायम कर दिया।इससे पहले 84.61 फीसदी मतदान का रिकॉर्ड था तब भी बंगाल में ही हुआ था। लेकिन राजनीति विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ा हुआ मतदान एस आई आर ( मतदाता सूची के गहन परीक्षण) के कारण हुआ है क्योंकि बोगस मतदाता सूची से पृथक हो गया और बंगाल में 294 विधानसभा सीटों पर करीब नब्बे लाख मतदाता हटे इस कारण वोटिंग प्रतिशत पर घनात्मक परिवर्तन हुआ बताया जाता है कि बंगाल से बाहर गए लोग भी इस डर शत प्रतिशत वोट करने रेलगाडिय़ों से आए कि उनका मतदाता सूची से नाम पृथक नहीं हो जाय और उनकी शासकीय योजनाओं में से नाम पृथक नहीं हो सकता है यहां तक कि उनका आधार कार्ड, पेन कार्ड, पासपोर्ट समाप्त न हो जाएगा। सही बात भी मीडिया, राजनीतिक नेता नहीं कह रहे हैं कि भला हो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का जिन्होंने एस आई आर कराया और बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में 2400 कंपनियों पैरा मिलिट्री फोर्स की मतदान केंद्र की सुरक्षा और निष्पक्ष मतदान के लिए लगाई जिन्होंने चुनावी हिंसा को रोका।इससे पहले बंगाल में रक्त रंजित ही चुनाव होते रहे थे।इसी सुरक्षा और एस आई आर के चलते रिकॉर्ड और शांति पूर्ण चुनाव हुआ है लेकिन असली बात कहने को कोई राजी नहीं है। वरना भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार शिवेंदु सरकार को तुड़मूल कांग्रेस के गुंडों ने क्या हाल किया । हिमायु कबीर की किस तरह धुनाई की गई वह तो वहां पर सीआरपीएफ थी वरना तुड़मूल कांग्रेस के गुंडों ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। बिहार, महाराष्ट्र, असम, केरल, पांडिचेरी, हरियाणा,दिल्ली, तमिलनाडु में भी एस आई आर ने कमाल कर दिया है।चुनाव विशेषज्ञ यशवंत देशमुख का मानना है कि एस आई आर के विभिन्न राज्यों अच्छे परिणाम आए हैं और इस दिशा चुनाव आयोग ने उल्लेखनीय कार्य किया है। सूत्रों के मुताबिक अब भारत में जब सभी राज्यों में एस आई आर हो जाएगा तो एक स्थाई मतदाता सूची बन जाएगी जैसा अमेरिका, ब्रिटिश, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली सहित अनेक देशों में है।
और यह सूची ऑनलाइन होगी।जब मतदाता फॉर्म 6,7,8 भरेगा उसका नाम विधानसभा क्षेत्र से पृथक उसकी चाही गई विधानसभा क्षेत्र में दर्ज कर दिया जाएगा। इससे नवीनतम जनगणना को भी लिंक किया जाएगा। भारत की आवादी का स्थाई अकड़ा निकल सकता है।जब नया मतदाता बनने के लिए कोई फॉर्म नहीं भेजा क्योंकि 18 वर्ष पूरे होने पर मतदाता स्वत: ही बन सकता है।
दूसरा सवाल यह है कि बढी संख्या में मतदान सत्ता विरोधी लहर के कारण भी हो सकता है।या सत्ता के पक्ष में भी हो सकता है। भारतीय जनता पार्टी इस बढ़ें हुए मतदान को परिवर्तन मना रही है क्योंकि बंगाल विधानसभा में भाजपा नेता सुबेंदु अधिकारी, दिलीप घोष,कह रहे हैं कि कि सत्ता विरोधी लहर है।जबकि तुड़मूल कांग्रेस इसे बंगाली अस्मिता से जोड़ रही है।
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