कोरबा 28 अप्रैल (आरएनएस) तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों के खतरे को देखते हुए पुलिस ने अब सीधा अलर्ट मोड ऑन कर दिया है और ‘सजग कोरबा, सतर्क कोरबा’ अभियान के तहत ऐसी मुहिम छेड़ी है जिसमें हर सेकंड की कीमत तय कर दी गई है, साफ संदेश है—जितनी जल्दी शिकायत, उतनी जल्दी पैसा बचने की उम्मीद, वरना ट्रांजेक्शन के जाल में फंसकर रकम पलभर में कई खातों में गायब हो सकती है, पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और अनुविभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में पूरे जिले में साइबर जागरूकता अभियान को तेज किया गया है, थाना और चौकी स्तर तक पुलिस एक्टिव मोड में है और साइबर पुलिस थाना लगातार लोगों को सतर्क कर रहा है, इसी कड़ी में मोबाइल ऑपरेटर्स और बैंक अधिकारियों की बैठक लेकर उन्हें संदिग्ध लेन-देन पहचानने और तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि ठगी की घटनाओं को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके, पुलिस ने आम नागरिकों को चेतावनी दी है कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या मैसेज के झांसे में न आएं और भूलकर भी अपना OTP, बैंक डिटेल या UPI PIN किसी के साथ साझा न करें क्योंकि यही वह चाबी है जिससे ठग आपके खाते को मिनटों में खाली कर देते हैं, अगर कोई भी व्यक्ति साइबर फ्रॉड का शिकार होता है तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करने या नजदीकी थाना अथवा साइबर पुलिस थाना में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है, पुलिस ने साफ किया है कि शुरुआती कुछ मिनटों में की गई शिकायत ही पैसे को होल्ड या वापस दिलाने में सबसे अहम भूमिका निभाती है, देरी का मतलब है रकम का ट्रेस करना और रिकवर करना बेहद मुश्किल हो जाना, इसके साथ ही कंट्रोल रूम नंबर 9479193399 भी जारी किया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मिल सके, कोरबा पुलिस लगातार लोगों तक यह संदेश पहुंचा रही है कि सतर्कता ही सुरक्षा है और जागरूक नागरिक ही साइबर ठगों की सबसे बड़ी हार हैं, बहरहाल यह अभियान साफ संकेत देता है कि अब डिजिटल दुनिया में जरा सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है और बचाव का सबसे बड़ा हथियार है—तुरंत एक्शन और पूरी सतर्कता।
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