रायगढ़, 28 अप्रैल (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक अनोखी विवाह परंपरा इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां दूल्हा-दुल्हन ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ जलते अंगारों पर चलकर विवाह की रस्में पूरी कीं। यह परंपरा वर्षों पुरानी है, जिसे आज भी आदिवासी समाज पूरी आस्था के साथ निभा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर बिलासपुर गांव में राठिया परिवार के गंधेल गोत्र में यह परंपरा प्रचलित है। विवाह के बाद जब दुल्हन को घर लाया जाता है, तो सबसे पहले घर के देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। इसके बाद मंडप में जलते हुए अंगारे बिछाए जाते हैं।
परंपरा के अनुसार, बकरे की बलि देने के बाद घर के मुखिया पर देवता सवार होने की मान्यता है। इसके पश्चात वे अनुष्ठान का संचालन करते हुए नृत्य करते हैं और अंगारों की व्यवस्था करते हैं। इसी दौरान दूल्हा-दुल्हन सहित परिवार के कई सदस्य नंगे पैर अंगारों पर चलते हैं। आश्चर्यजनक रूप से इस प्रक्रिया में किसी को जलन या चोट नहीं लगती।
परिवार के लोगों का कहना है कि इस अनुष्ठान से पहले कई सदस्य उपवास रखते हैं और पानी तक ग्रहण नहीं करते। दुल्हन के घर प्रवेश से पहले बकरे की बलि देकर उसके रक्त से तिलक किया जाता है, जिसके बाद आगे की रस्में संपन्न होती हैं।
ग्रामीणों का विश्वास है कि यह परंपरा पीढिय़ों से चली आ रही है और इसे निभाना आवश्यक है। उनका मानना है कि यदि इस रीति का पालन नहीं किया गया, तो देवी-देवता नाराज हो सकते हैं और परिवार पर संकट आ सकता है।
इस अनोखी शादी को देखने के लिए गांव ही नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। जलते अंगारों पर चलते दूल्हा-दुल्हन का दृश्य लोगों के लिए आकर्षण और आस्था का केंद्र बना हुआ है।
वर्तमान में यह अनोखी परंपरा सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है, जिस पर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
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