लखनऊ 28 अप्रैल (आरएनएस )। नगर निगम लखनऊ द्वारा सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत मंगलवार को एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए ग्राम हसनपुर खेवली क्षेत्र में अवैध कब्जे के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए। यह कार्रवाई नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देशन तथा अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में की गई, जिसमें प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर प्रभावी ढंग से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को अंजाम दिया।अभियान के दौरान ग्राम हसनपुर खेवली (अंसल), तहसील सरोजनी नगर, जिला लखनऊ स्थित गाटा संख्या 710 की सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराया गया। इस गाटा का कुल क्षेत्रफल 0.607 हेक्टेयर ऊसर भूमि है, जिसमें से 0.253 हेक्टेयर भूमि पर कुछ व्यक्तियों द्वारा अवैध रूप से कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा था। स्थानीय स्तर पर अस्थायी बाउंड्री वॉल बनाकर तथा पौधरोपण कर भूमि पर स्वामित्व स्थापित करने की कोशिश की जा रही थी।नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया और जेसीबी मशीन की सहायता से अवैध रूप से बनाई गई बाउंड्री वॉल तथा अन्य अस्थायी निर्माणों को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को अतिक्रमण से मुक्त कराते हुए सरकारी भूमि को सुरक्षित कराया। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई योजनाबद्ध तरीके से की गई, जिससे किसी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो और सरकारी संपत्ति को नुकसान से बचाया जा सके।इस अभियान का नेतृत्व सहायक नगर आयुक्त एवं प्रभारी अधिकारी (संपत्ति) रामेश्वर प्रसाद तथा तहसीलदार नगर निगम अरविंद पाण्डेय द्वारा गठित टीम ने किया। मौके पर नायब तहसीलदार तेजस्वी प्रकाश के नेतृत्व में पूरी टीम सक्रिय रही और कार्रवाई को सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। इस दौरान राजस्व निरीक्षक प्रदीप गिरी, नगर निगम लेखपाल अनुपम कुमार, संदीप कुमार तथा राजस्व लेखपाल ओम प्रकाश गौड़ सहित नगर निगम की प्रवर्तन टीम भी मौके पर मौजूद रही और अभियान को सुचारु रूप से संचालित किया।नगर निगम अधिकारियों के अनुसार कब्जामुक्त कराई गई 0.253 हेक्टेयर भूमि की वर्तमान बाजार कीमत लगभग चार करोड़ रुपये आंकी गई है। इस कार्रवाई को सरकारी संपत्ति की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।अधिकारियों ने बताया कि नगर निगम द्वारा सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने का अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। जहां भी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की सूचना प्राप्त होगी, वहां त्वरित कार्रवाई करते हुए भूमि को मुक्त कराया जाएगा, ताकि सरकारी संपत्तियों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके और भविष्य में अतिक्रमण की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
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