नईदिल्ली,06 जुलाई(आरएनएस)। भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाने का रास्ता आसान हो गया है। सोमवार को यूरोपीय मानवाधिकार कोर्ट (ईसीएचआर) ने उनको झटका देते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। मोदी ने अप्रैल 2026 में अपने प्रत्यर्पण को मानवाधिकार का उल्लंघन बताते हुए ईसीएचआर में याचिका दायर की थी। यह याचिका खारिज होने के बाद अब मोदी के अपील के लिए कोई विकल्प नहीं बचा है और अब जल्द ही उनको भारत भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
ब्रिटेन की हाई कोर्ट ने मोदी की तमाम याचिकाओं को अस्वीकार कर दिया था और उसके तत्काल प्रत्यर्पण के लिए दस्तावेजों को भारत को सौंपने का फैसला दिया था। तब हाई कोर्ट ने यह माना था कि जेल की स्थितियों और व्यवहार के संबंध में मोदी ने जो आपत्तियां उठाई हैं, उस पर भारत की ओर से दिए गए आश्वासन पर्याप्त थे। इसके बाद अप्रैल 2026 में मोदी ईसीएचआर के समक्ष पहुंचे थे।
मोदी ने ईसीएचआर में दावा किया था कि भारत में प्रत्यर्पण के बाद उनको यातना और खराब जेल से स्वास्थ्य बिगडऩे का डर है। उन्होंने दावा किया कि अगर उन्हें भारत भेज दिया गया तो, उन पर पुलिस या जेल में यातना दी जाएगी। भारत की जेलों की स्थिति बहुत खराब है, जिससे उनके मानवाधिकार का उल्लंघन होगा। उन्होंने संजय भंडारी को मिली राहत का उदाहण दिया था, जिसका ब्रिटेन की अदालत ने मानवीय आधार पर प्रत्यावर्तन रोका था।
मोदी ने अपने मामा मेहुल चोकसी के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों से पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) समेत कई बैंकों से कर्ज लिया और नहीं चुकाया। दोनों ने मिलकर बैंकों को लगभग 14,000 करोड़ रुपये का चूना लगाया। मोदी मार्च, 2019 में भारत छोड़कर ब्रिटेन में जाकर रहने लगा था। उसके ऊपर धोखाधड़ी, मनीलॉन्ड्रिंग और सबूतों के छेड़छाड़ के आपराधिक मामले हैं, जिसकी जांच सीबीआई और ईडी कर रही है। मोदी मार्च 2019 से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में है।
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