रांची 29 अप्रैल (आरएनएस)। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) की ओर से सर्कुलर रोड स्थित न्यू सर्किट हाउस में आयोजित तीन दिवसीय सुनवाई संपन्न हो गई। आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस दौरान कुल 66 मामलों की सुनवाई की गई, जिनमें से 15 मामलों का समाधान कर लिया गया। उन्होंने बताया कि अधिकांश मामले एट्रोसिटी, जमीन विवाद और सर्विस से संबंधित थे। आयोग के निर्देश पर एक मामले में बुधनी देवी को पेंशन मिलना शुरू हो गया है, वहीं पशुपालन विभाग में कार्यरत अलका कच्छप को पदोन्नति भी मिल चुकी है।
जमीन से जुड़े मामलों पर विशेष चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि कई मामलों में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) का उल्लंघन हुआ है। रांची जिले के बुकरु स्थित चामा गांव से जुड़े छह मामलों में जबरन जमीन हस्तांतरण और आदिवासियों को डराकर कब्जा करने की शिकायत सामने आई है। इस पर जिला प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। डीसी और एसएसपी को आरोपितों के खिलाफ फिर दर्ज कर वारंट जारी करने तथा शीघ्र चार्जशीट दाखिल कर आयोग को रिपोर्ट देने को कहा गया है।
वहीं राजधानी के वार्ड-26 स्थित हरमू अस्पताल मामले में आयोग ने डीसी को निर्देश दिया कि संबंधित जमीन से जुड़े आदिवासी परिवार की वंशावली का सत्यापन सीओ से कराया जाए। साथ ही यह भी सामने आया कि रांची नगर निगम द्वारा जी+2 भवन की स्वीकृति के बावजूद अस्पताल का संचालन जी+3 भवन में किया जा रहा है, जो स्वीकृत नक्शे का उल्लंघन है।इसके अलावा चाईबासा की एक गंभीर घटना का जिक्र करते हुए बताया गया कि एक आदिवासी परिवार को एम्बुलेंस सुविधा नहीं मिलने के कारण बच्चे का शव 60 किलोमीटर दूर थैले में ले जाना पड़ा। इस पर आयोग ने स्वास्थ्य विभाग को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि ऐसी घटना दोबारा न हो। एम्बुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एनजीओ के साथ एमओयू करने के भी निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि आदिवासियों के अधिकारों के संरक्षण और मामलों के त्वरित समाधान के लिए संबंधित विभागों को जवाबदेह बनाया जाएगा।
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