दुर्ग, 30 अप्रैल 2026 (आरएनएस) —रक्षित केन्द्र दुर्ग के “दधीचि प्रशिक्षण” हॉल में बुधवार को ऐसा नज़ारा दिखा, जहां पुलिस वर्दी सिर्फ कानून लागू करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि जिंदगी बचाने की कला भी सीखती नजर आई, दुर्ग पुलिस ने राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण और प्राथमिक उपचार पर आयोजित कार्यशाला में साफ संदेश दिया कि अब धूम्रपान करने वालों पर सख्ती भी होगी और सड़क हादसों में तड़पते लोगों को वक्त रहते राहत भी मिलेगी, कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों, विवेचकों, पेट्रोलिंग स्टाफ और डायल-112 के जवानों सहित करीब 69 कर्मियों ने हिस्सा लिया, जहां स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कोटपा एक्ट 2003 के तहत धारा 4 के सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध, धारा 5 के विज्ञापन प्रतिबंध और धारा 6 (अ)(ब) के तहत नाबालिगों को तंबाकू बिक्री और स्कूलों के 100 गज के दायरे में बिक्री पर रोक के कानूनी प्रावधानों को विस्तार से समझाया और चालानी कार्रवाई की प्रक्रिया स्पष्ट की, मंच से साफ कहा गया कि अब नियम तोड़ने वालों पर सीधे कार्रवाई होगी, वहीं दूसरी ओर कार्यशाला का सबसे प्रभावी हिस्सा रहा “गोल्डन ऑवर” पर दिया गया लाइव डेमो, जहां विशेषज्ञों ने बताया कि हादसे के बाद का पहला एक घंटा किसी भी घायल के लिए जिंदगी और मौत के बीच की सबसे अहम कड़ी होता है, डॉक्टरों की टीम—सीएचएमओ डॉ. मनोज दानी, डॉ. अर्चना चौहान, डॉ. सोनल सिंह और डॉ. विभोर—ने सीपीआर, खून बहाव रोकने और सुरक्षित तरीके से घायलों को अस्पताल पहुंचाने की तकनीकों का प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया, जिससे पुलिस जवान मौके पर ही जीवनरक्षक की भूमिका निभा सकें, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) ने अपने संबोधन में कहा कि लगातार प्रशिक्षण ही पुलिस को तेज, अनुशासित और प्रभावी बनाता है, और यही कौशल आपात स्थिति में फर्क पैदा करता है, कार्यक्रम में जिला रेड क्रॉस सोसायटी दुर्ग के सदस्य अरविंद सुराना ने भी जनजागरूकता की जरूरत पर जोर दिया, पूरे आयोजन में रक्षित केन्द्र के स्टाफ, स्वास्थ्य विभाग और रेड क्रॉस टीम की समन्वित भूमिका नजर आई, अंत में दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की कि तंबाकू कानूनों का पालन करें, सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान से बचें और सड़क हादसे में घायलों की मदद कर मानवता का फर्ज निभाएं—क्योंकि सही समय पर उठाया गया एक कदम किसी की पूरी जिंदगी बचा सकता है, और यही असली जिम्मेदारी है।


