रायपुर,29अप्रैल (आरएनएस)। राज्य सरकार द्वारा आयोजित सुशासन तिहार के सकारात्मक प्रभाव अब दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में भी स्पष्ट रूप से नजर आने लगे हैं। प्रशासन की सक्रियता और संवेदनशीलता ने बस्तर जिले के छोटे किलेपाल गांव में रहने वाले दिव्यांग नागरिकों के जीवन में नई उम्मीद जगा दी है।जनपद पंचायत बास्तानार के अंतर्गत आने वाले इस गांव में रहने वाले सामनाथ ठाकुर और रीता ठाकुर, जो एक ही परिवार के सदस्य हैं, लंबे समय से शारीरिक अक्षमता के कारण आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों से जूझ रहे थे। दैनिक जरूरतों के लिए भी उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे उनका आत्मसम्मान प्रभावित हो रहा था।पिछले वर्ष आयोजित सुशासन तिहार के दौरान दोनों ने दिव्यांग पेंशन के लिए आवेदन किया। प्रशासन ने उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की। अधिकारियों ने आवश्यक दस्तावेजों—आधार कार्ड, बैंक पासबुक और राशन कार्ड—का संकलन कर प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया।पात्रता की पुष्टि के बाद दोनों को पेंशन स्वीकृत कर दी गई। पेंशन मिलने की सूचना मिलते ही परिवार में खुशी का माहौल बन गया। इस पहल से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है, बल्कि उनका आत्मविश्वास और सम्मान भी वापस लौटा है।यह उदाहरण दर्शाता है कि शासन की योजनाएं जब सही तरीके से क्रियान्वित होती हैं, तो वे दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंद लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकती हैं।
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