रायपुर,30 अप्रैल (आरएनएस)। प्रदेश में पड़ रही तीव्र गर्मी के बीच बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक मिसाल बनकर उभरा है। यहां अपनाई गई वैज्ञानिक जल प्रबंधन व्यवस्था के चलते भीषण गर्मी में भी वन्यजीवों को पर्याप्त और सुरक्षित पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा अभयारण्य क्षेत्र का विस्तृत सर्वे कर 240 से अधिक जल स्रोतों की पहचान की गई है, जिनमें तालाब, स्टॉप डैम, वॉटरहोल और कृत्रिम जल संरचनाएं शामिल हैं। योजना इस प्रकार बनाई गई है कि प्रत्येक पांच वर्ग किलोमीटर के दायरे में जल उपलब्धता सुनिश्चित हो, ताकि वन्यप्राणियों को भटकना न पड़े।इस पहल की खास बात यह है कि इसे तकनीक और डेटा आधारित बनाया गया है। सभी जल स्रोतों की जियो-टैगिंग की गई है और हर पंद्रह दिन में जल स्तर का आकलन किया जाता है। ‘स्टाफ गेजÓ के माध्यम से जल की स्थिति का आंकलन कर जरूरत के अनुसार तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं।वन्यजीवों को स्वच्छ और सुरक्षित पानी मिले, इसके लिए पानी की गुणवत्ता की भी नियमित जांच की जा रही है। श्च॥ और ञ्जष्ठस् जैसे मानकों की निगरानी से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पानी उनके स्वास्थ्य के अनुकूल हो। जिन क्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोत सूख गए हैं, वहां टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है।इसके साथ ही, वन्यजीवों की पोषण आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जल स्रोतों के पास ‘साल्ट लिकÓ बनाए गए हैं, जिससे उन्हें आवश्यक खनिज भी उपलब्ध हो सकें। यह व्यवस्था गर्मी के प्रभाव को कम करने में सहायक साबित हो रही है।वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह मॉडल केवल तत्काल राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक समाधान प्रदान करता है। लगातार निगरानी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के कारण जल संकट की स्थिति आने से पहले ही आवश्यक प्रबंधन संभव हो पा रहा है। यह पहल वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रभावी उदाहरण के रूप में सामने आई है।
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