-जमात-ए-इस्लामी हिंद और अंजुमन फरोग-ए-उर्दू के संयुक्त तत्वावधान में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन
रांची 30 अप्रैल (आरएनएस)। इस्लामी साहित्य की जानी-मानी हस्ती प्रोफेसर अहमद सज्जाद के निधन पर जमात-ए-इस्लामी हिंद और अंजुमन फरोग-ए-उर्दू के संयुक्त तत्वावधान में एक शोक सभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर शहर के कई बुद्धिजीवियों और गणमान्य लोगों ने प्रोफेसर साहब की साहित्यिक एवं सामाजिक सेवाओं को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। ज्ञात हो कि वर्ष 1939 में नालंदा में जन्मे प्रोफेसर अहमद सज्जाद का गत 26 अप्रैल 2026 की रात इंतकाल हो गया था।
कार्यक्रम का आगाज मौलाना समीउल्लाह फलाही द्वारा पवित्र कुरान की तिलावत और उसके तर्जुमे से हुआ। इसके पश्चात, हाफिज मोहम्मद दानिश अयाज ने प्रोफेसर अहमद सज्जाद के व्यक्तित्व और उनके साहित्यिक सफर पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने उपस्थित लोगों को बताया कि साहित्य जगत में प्रोफेसर साहब का योगदान अमूल्य है। उनकी अब तक 16 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जबकि दो अन्य किताबें प्रकाशन की प्रक्रिया में हैं। शोक सभा में मौलाना आजाद कॉलेज, रांची के प्रोफेसर अशरफ हुसैन, इंजीनियर एजाज अहमद, हसीब खान, अब्दुल अजीज फलाही, सामाजिक कार्यकर्ता अफजल अनीस, इंजीनियर तारिक सज्जाद, मोहम्मद असलम खान और डॉ. खालिद सज्जाद ने अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि प्रोफेसर साहब ने साहित्यिक, सामाजिक और संगठनात्मक स्तर पर जो सादगी भरा और उद्देश्यपूर्ण जीवन व्यतीत किया, वह आने वाली पीढिय़ों के लिए एक मशाल के समान है।कार्यक्रम के अंतिम चरण में डॉ. हसन रजा ने अपना अध्यक्षीय भाषण प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रोफेसर अहमद सज्जाद के व्यक्तित्व और उनकी रचनाओं की विस्तृत समीक्षा की। अपने संबोधन में डॉ. रजा ने भारी मन से प्रोफेसर साहब के साथ अपने 50 वर्षों के लंबे और गहरे संबंधों का जिक्र किया। शोक सभा का सफल संचालन मोहम्मद गालिब नश्तर ने किया। कार्यक्रम में शहर के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से मतलूब अहमद, मोहम्मद कलीमउद्दीन, मोहम्मद अमीनउद्दीन, डॉ. मोहम्मद मुकम्मल हुसैन, मोहम्मद इकबाल, मास्टर अब्दुल हसीब, सुहैल अख्तर, मोहम्मद यूसुफ, अब्दुर रहमान, राशिद जमाल, नकीब अहमद और अली अहमद शमीम आदि के नाम प्रमुख हैं।
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