मातृभाषाओं के सम्मान और संरक्षण के लिए नीतिगत निर्णय ले सरकार: कांग्रेस
रांची 30 अप्रैल (आरएनएस)। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने कहा है कि क्षेत्रीय भाषाओं के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन के लिए कांग्रेस पार्टी हमेशा प्रतिबद्ध रही है। उन्होंने कहा कि अंगिका, मगही, भोजपुरी और मैथिली जैसी समृद्ध भाषाओं को परीक्षाओं में शामिल करने की मांग पूरी तरह न्यायसंगत है तथा सरकार को इस दिशा में शीघ्र नीतिगत फैसला करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा इस दिशा में कमिटी गठित करने का फैसला स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। विभिन्न भाषाओं में तैयारी कर रहे छात्रों में गहरा आक्रोश और निराशा देखी जा रही है।उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 और 2016 की शिक्षक पात्रता परीक्षा की अधिसूचनाओं में अंगिका, मगही और भोजपुरी जैसी भाषाऐं शामिल थी, लेकिन करीब एक दशक बाद आयोजित हो रही परीक्षा में इन भाषाओं को हटाना दुर्भाग्यपूर्ण और छात्रों के हितों के खिलाफ है।
दूबे ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसी नई भाषा को जोडऩे की मांग नहीं कर रही है, बल्कि पहले से शामिल भाषाओं को यथावत बनाए रखने की बात कर रही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषाएं लाखों विद्यार्थियों की पहचान, संस्कृति और अस्तित्व से जुड़ी हैं, ऐसे में इन्हें नजरअंदाज करना उचित नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा कि छात्रों की भावनाओं और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए तत्काल उचित कदम उठाए जाने चाहिए। आलोक कुमार दूबे ने कहा कि कैबिनेट के निर्णयों के बाद विभिन्न भाषाई संगठनों ने संपर्क कर शिक्षक पात्रता परीक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल कराने का आग्रह किया है। ऐसे में हजारों विद्यार्थियों के भविष्य की अनदेखी नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस मानती है कि मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान की आत्मा हैं, इसलिए इनके अधिकारों की रक्षा करना अत्यंत आवश्यक है। सरकार को छात्रों और भाषाई समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
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