न्यूयॉर्क ,01 मई ,। मिडिल-ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढऩे के संकेत मिल रहे हैं। इस बीच ‘यूएस सेंट्रल कमांडÓ (ष्टश्वहृञ्जष्टह्ररू) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ संभावित कार्रवाई के विकल्पों पर विस्तृत ब्रीफिंग दी है। इससे संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन अब कूटनीति के साथ-साथ सैन्य दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, करीब 45 मिनट चली इस हाई-लेवल ब्रीफिंग में ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों पर विस्तार से चर्चा की गई। अमेरिकी सैन्य योजनाकार इस बात के लिए भी तैयार हैं कि यदि अमेरिका कोई कार्रवाई करता है, तो ईरान क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमला कर सकता है। इस बैठक में ज्वाइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि अमेरिका गंभीरता से सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ष्टश्वहृञ्जष्टह्ररू ने ‘शॉर्ट एंड इंटेंसÓ रणनीति का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत कम समय में सटीक और तेज हमले कर ईरान के महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। इसका उद्देश्य ईरान पर दबाव बनाकर उसे परमाणु मुद्दे पर बातचीत के लिए मजबूर करना है।
पत्रकारों द्वारा संभावित बातचीत पर पूछे गए सवाल के जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, वे (ईरान) छिपे हुए हैं और समझौता करना चाहते हैं। इस बयान से स्पष्ट है कि अमेरिका ‘मैक्सिमम प्रेशरÓ की नीति पर आगे बढ़ रहा है।
ष्टश्वहृञ्जष्टह्ररू के प्रस्तावों में हाइपरसोनिक ‘डार्क ईगलÓ मिसाइलों की तैनाती भी शामिल है, जो तेज और सटीक हमलों के लिए जानी जाती हैं। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण स्थापित करने का विकल्प भी विचाराधीन है, जिससे वैश्विक व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित न हो। हालांकि, ऐसे कदम से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।
एक अन्य रणनीति के तहत ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करने के लिए विशेष बलों की कार्रवाई का सुझाव भी दिया गया है। इसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सीधे प्रभाव डालने वाला कदम माना जा रहा है।
इसी बीच, ईरान की राजधानी तेहरान में गुरुवार रात एयर डिफेंस सिस्टम के सक्रिय होने की खबर सामने आई। ईरानी मीडिया के अनुसार, यह कार्रवाई छोटे ड्रोन या टोही विमानों को रोकने के लिए की गई थी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह अभ्यास था या किसी वास्तविक खतरे की प्रतिक्रिया।
रिपोर्ट्स यह भी संकेत देती हैं कि अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी को एक प्रभावी विकल्प मान रहा है, जो सीधे सैन्य हमले की तुलना में कम जोखिम भरा हो सकता है, लेकिन ईरान पर दबाव बढ़ाने में सक्षम है। हालांकि, इस स्थिति में भी जवाबी कार्रवाई की आशंका बनी हुई है।
कुल मिलाकर, मौजूदा हालात यह दर्शाते हैं कि अमेरिका दोहरी रणनीति अपना रहा है—एक ओर कूटनीतिक विकल्प खुले रखे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य तैयारी भी पूरी रखी जा रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि स्थिति बातचीत की दिशा में आगे बढ़ती है या किसी बड़े सैन्य टकराव का रूप लेती है।
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