आपरेशन साथ-साथ की बड़ी कामयाबी
टूटते परिवारों को जोडऩे की एक पहल
महिला थाना पुलिस ने की काउंसलिंग
बस्ती 1 मई (आरएनएस)। पुलिस विभाग द्वारा चलाए जा रहे आपरेशन साथ-साथ के तहत महिला थाने को एक बड़ी सफलता मिली है। महिला थाना प्रभारी (एसएचओ) की सूझबूझ और प्रभावी काउंसलिंग के चलते पांच ऐसे परिवार, जो अलगाव की कगार पर खड़े थे, गिले-शिकवे भुलाकर फिर से एक हो गए हैं। पुलिस की इस मानवीय पहल की शहर में हर तरफ सराहना हो रही है। इनके बीच मामूली विवादों ने दूरियां बढ़ा दी थी। बताया जा रहा है कि इन पांचों मामलों में पति-पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। छोटे-मोटे झगड़े, आपसी ईगो और घरेलू गलतफहमियों के चलते ये परिवार टूटने की स्थिति में थे। मामले महिला थाने पहुंचे थे, जहां मुकदमा दर्ज करने के बजाय एसएचओ ने आपरेशन साथ-साथ के तहत समझौते का रास्ता चुना।
घंटों चली काउंसलिंग, पसीज गए दिल
महिला थाना प्रभारी डा. शलिनी सिंह ने दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाकर घंटों बात की। काउंसलिंग के दौरान स्वजन को परिवार के महत्व और ब’चों के भविष्य का हवाला दिया गया। एसएचओ के प्रयासों का असर यह हुआ कि जोड़ों ने एक-दूसरे के प्रति अपनी शिकायतों को वापस लेने का फैसला किया और भविष्य में साथ मिलकर रहने का वचन दिया। एसएचओ ने बताया कि हमारा प्रयास केवल अपराधियों को पकडऩा नहीं, बल्कि समाज की बुनियादी इकाई परिवार को बचाना भी है। आपरेशन साथ-साथ का उद्देश्य टूटे हुए रिश्तों में फिर से विश्वास बहाल करना है। शुक्रवार को पांच परिवारों प्रीति मोदनवाल पत्नी संदीप कुमार निवासी प्रतापनगर, थाना बांसी,सिद्धार्थनगर,शाबाना खातून पत्नी अमन मूडघाट, आईटीआई कालेज बस्ती,गुडिय़ा पत्नी बब्बू सोनकर दौलतपुर चौकी- सोनूपार, कोतवाली, बस्ती, मनीषा पत्नी पुत्री भोला, दौलतपुर, कोतवाली,सुबीना खातून पत्नी फिरोज अहमद सियरापार मजीपुरा, थाना वाल्टरगंज, बस्ती को साथ जाते देख हमारी पूरी टीम को संतोष मिला है।
फूलों की माला और मिठाई के साथ हुई विदाई
थाना परिसर में जब ये पांचों जोड़े फिर से एक हुए, तो वहां का माहौल भावुक हो गया। पुलिसकर्मियों ने उन्हें मिठाई खिलाकर और फूलों के हार पहनाकर विदा किया। स्वजन ने भी पुलिस की इस नेक पहल का आभार व्यक्त किया।
यह है आपरेशन साथ-साथ:
पुलिस अधीक्षक डा. यशवीर सिंह के निर्देशन ने जनपद पुलिस इस विशेष मुहिम का मुख्य उद्देश्य पारिवारिक विवादों का निपटारा कोर्ट-कचहरी और मुकदमों के बोझ के बिना करना है। इसमें पुलिस अधिकारी एक काउंसलर की भूमिका निभाते हैं, ताकि समाज में स्वस्थ वातावरण बना रहे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की पुष्टि, तीन आरोपित अब भी फरार
गया प्रसाद हत्याकांड:
बस्ती: ड्राइवर गया प्रसाद वर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु के मामले में एक बड़ा पर्दाफाश हुआ है। शुक्रवार को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस बात की तस्दीक कर दी है कि गया प्रसाद की मृत्यु स्वाभाविक नहीं, बल्कि गला दबाकर उनकी हत्या की गई थी। इस बात की पोल पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोल दी है। शंकरपुर कुचुनपुावा गांव में में अभी भी तनावपूर्ण सन्नाटा छाया हुआ है। इस घटना को अंजाम देने के आरोपित सात में तीन नामजद आरोपितों को अभी भी पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी है। बीते बुधवार को हुई इस वारदात के बाद से ही स्वजन व ग्रामीणों ने हत्या की आशंका जताई थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। रिपोर्ट के अनुसार, मृतक के गले की हड्डी टूटी हुई पाई गई है और मौत का मुख्य कारण दम घुटना (स्ट्रेंगुलेशन) बताया गया है। शरीर पर संघर्ष के निशान भी मिले हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आरोपितों और दिवंगत के बीच हाथापाई हुई थी।
स्वजन में आक्रोश, न्याय की मांग
गया प्रसाद वर्मा की हत्या के बाद से उनके परिवार में मातम पसरा हुआ है। स्वजन का आरोप है कि पुलिस की ढिलाई के कारण आरोपित गांव छोड़कर भागने में सफल रहे। शुक्रवार को ग्रामीणों और स्वजन ने पुलिस प्रशासन से जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। हालांकि एसपी ने इस मामले में चौकी प्रभारी शशि शेखर सिंह, आरक्षी काशीनाथ पांडेय व राहुल सिंह पर सही तरीके से कार्यवाही न करने घूस मांगने का आरोप लगाए जाने की बात को संज्ञान लेकर तत्काल प्रभाव से तीनों को निलम्बित कर दिया है, साथ ही विभागीय जांच के आदेश दिया है।
इस हत्याकांड से संबंधित प्रमुख बिंदु:
:दिवंगत: गया प्रसाद वर्मा (पेशे से ड्राइवर)।
:वजह: पोस्टमार्टम में गला दबाकर हत्या की बात सामने आई।
:स्थिति: तीन नामजद आरोपी अभी भी फरार, पुलिस तलाश में जुटी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि यह हत्या का मामला है। साक्ष्यों के आधार पर वांछित आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगातार दबिश दे रही हैं, जल्द ही तीनों हत्यारोपितों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
: स्वर्णिमा सिंह, सीओ हर्रैया, बस्ती
जिलें के 1.22 लाख किसान अब भी डिजिटल पहचान से वंचित
फार्मर रजिस्ट्री:
विशेष अभियान के बाद भी लक्ष्य से दूर विभाग
जिले में कुल 5.20 लाख किसान हैं पंजीकृत
सरकारी योजनाओं के लाभ पर मंडराया संकट
बस्ती: किसानों को सरकारी योजनाओं का पारदर्शी और त्वरित लाभ दिलाने के लिए शुरू किया गया फार्मर रजिस्ट्री अभियान जिले में सुस्त पड़ता दिखाई दे रहा है। शासन के कड़े निर्देशों के बाद चलाए गए एक महीने चलाए गए विशेष अभियान के बावजूद अब भी बड़ी संख्या में किसान इस प्रक्रिया से नहीं जुड़ पाए हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिले के कुल 5.20 लाख पंजीकृत किसानों में से 1.22 लाख किसान अब भी फार्मर रजिस्ट्री से वंचित हैं। जिले में कृषि विभाग और राजस्व टीम को संयुक्त रूप से शत-प्रतिशत किसानों की रजिस्ट्री करने का लक्ष्य सौंपा गया था। हालांकि, जमीनी स्तर पर तकनीकी खामियों और जागरूकता की कमी के कारण लक्ष्य अब भी कोसों दूर है।
इसलिए जरूरी है फार्मर रजिस्ट्री
केंद्र और राÓय सरकार की मंशा है कि किसानों का एक डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाए। फार्मर रजिस्ट्री नहीं होने से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की अगली किस्त रुक सकती है।
खाद, बीज और कीटनाशकों पर मिलने वाली सब्सिडी सीधे आधार लिंक खाते में जाएगी। आपदा की स्थिति में मुआवजे की प्रक्रिया सरल और तेज होगी। केसीसी बनवाने में बार-बार खतौनी देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
चुनौतियां: सर्वर और ई-केवाईसी बनी बाधा
अभियान की धीमी गति के पीछे कई तकनीकी कारण हैं। खतौनी में अंश निर्धारण नहीं होना। ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वर की समस्या और किसानों के मोबाइल नंबर का आधार से लिंक न होना। बड़ी संख्या में किसानों का जनपद से बाहर रह करअन्य प्रदेश में काम करना अभियान की सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरी है। इसके अलावा, कई मामलों में जमीन के रिकार्ड (खतौनी) और आधार कार्ड के नाम में विसंगति होने के कारण भी मिसमैच की समस्या आ रही है।
चेतावनी: रुक जाएगी प्रधानमंत्री सम्मान निधि
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय के भीतर फार्मर रजिस्ट्री का कार्य पूर्ण नहीं होता है, तो आगामी सीजन में किसानों को खाद-बीज की सब्सिडी और सम्मान निधि जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं से हाथ धोना पड़ सकता है। विभाग अब उन ब्लॉकों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जहाँ प्रतिशत सबसे कम है।
प्रमुख बिंदु जो किसानों को जानने चाहिए:
:रजिस्ट्री के लिए आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और भूमि संबंधी दस्तावेज अनिवार्य हैं।
:यह प्रक्रिया पूरी तरह नि:शुल्क है (राजकीय केंद्रों पर)।
:डिजिटल पहचान मिलने के बाद बिचौलियों का हस्तक्षेप खत्म होगा।
हमारा लक्ष्य हर पात्र किसान को डिजिटल पहचान देना है। 1.22 लाख किसानों का डेटा जल्द से जल्द अपडेट करने के लिए पंचायत स्तर पर फिर से शिविर लगाए जाएंगे। फिर भी 76.5 प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। जो किसान छूट गए हैं, वे अपनी नजदीकी जनसेवा केंद्र या कृषि कार्यालय में संपर्क करें।
: अशोक कुमार गौतम, उप कृषि निदेशक, बस्ती
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

