लखनऊ ,02 मई (आरएनएस)। उत्तर प्रदेश में गन्ना खेती ने बीते वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। गन्ना देश की प्रमुख नकदी फसलों में से एक है और चीनी उत्पादन का मुख्य आधार भी है। प्रदेश में 29.66 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में गन्ने की खेती की जा रही है, जिससे करीब 48 लाख किसान जुड़े हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है।प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गन्ना किसानों को हर स्तर पर सहयोग प्रदान किया जा रहा है। नवीन तकनीकों और उन्नत बीजों के प्रयोग से उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है। बीते नौ वर्षों में 48 लाख किसानों को 3,20,461 करोड़ रुपये से अधिक का गन्ना मूल्य भुगतान किया गया है, जो वर्ष 1995 से मार्च 2017 तक हुए कुल भुगतान से 66,703 करोड़ रुपये अधिक है। समय से भुगतान मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।गन्ने का रकबा वर्ष 2016-17 में 20.54 लाख हेक्टेयर था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 29.66 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गया है। इससे किसानों की आय में औसतन 400 रुपये प्रति कुंतल की दर से लगभग 46,880 रुपये प्रति हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, उत्पादन भी 72 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 84 टन प्रति हेक्टेयर हो गया है, जो प्रशिक्षण और वैज्ञानिक पद्धतियों का परिणाम है।प्रदेश में वर्तमान में 125 चीनी मिलें संचालित हैं। इनकी दैनिक पेराई क्षमता वर्ष 2017 से पहले 7.50 लाख टीसीडी थी, जो अब बढ़कर 8.36 लाख टीसीडी हो गई है। सरकार द्वारा 3 नई चीनी मिलों की स्थापना, 6 बंद मिलों का पुन: संचालन और 38 मिलों का क्षमता विस्तार किया गया है। इससे लगभग 1.25 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है।पिपराइच में आसवनी स्थापना और छाता में नई चीनी मिल व वेयरहाउस कॉम्प्लेक्स विकसित किए जा रहे हैं। खांडसारी नीति में बदलाव के बाद 285 नई इकाइयों को लाइसेंस जारी किए गए हैं, जिनमें से 176 इकाइयां संचालित हो चुकी हैं। इससे 73,700 टीसीडी अतिरिक्त पेराई क्षमता विकसित हुई है और लगभग 42 हजार लोगों को रोजगार मिला है।एथेनॉल उत्पादन के क्षेत्र में भी प्रदेश अग्रणी बन गया है। वर्ष 2017 में 42 करोड़ लीटर उत्पादन था, जो 2023-24 में बढ़कर 180 करोड़ लीटर और 2024-25 में 223 करोड़ लीटर तक पहुंच गया है। इसके साथ ही अंत:फसली खेती को बढ़ावा मिलने से किसानों को अतिरिक्त 25 प्रतिशत तक आय प्राप्त हो रही है।महिला सशक्तिकरण के तहत 37 जिलों में 3,208 महिला स्वयं सहायता समूह गठित किए गए हैं, जिनमें 60,092 महिलाएं उद्यमी के रूप में कार्य कर रही हैं। इन समूहों को अब तक 6622.92 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है।प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना किसानों को दी जा रही सुविधाओं और योजनाओं के प्रभाव से किसान आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं और प्रदेश कृषि विकास के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।
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