खागा, फतेहपुर ,02 मई (आरएनएस)। किशनपुर थाना क्षेत्र के महावतपुर, असहट, एकडला, जगदीशपुर, गुरुवल, मड़ौली समेत यमुना तटवर्ती गांवों में मत्स्य ठेकेदारों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर लगातार मत्स्य आखेट किए जाने का मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि ठेकेदार प्रतिबंधित और अत्यधिक छोटे जालों का प्रयोग कर छोटी से छोटी मछलियों तक का शिकार कर रहे हैं, जिससे यमुना नदी की जलीय संपदा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिलाधिकारी के निर्देश पर मत्स्य विभाग की टीम द्वारा जांच किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन जांच केवल कागजों तक सीमित नजर आई। ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक निरीक्षण तक नहीं कर सके, जिससे अवैध मत्स्य आखेट का कारोबार बेखौफ जारी है। ग्रामीणों के अनुसार मत्स्य ठेकेदार अत्यधिक छोटे और प्रतिबंधित जालों से छोटी से छोटी मछलियों का भी बड़े पैमाने पर शिकार कर रहे हैं। इन मछलियों को सुखाकर बाजारों में बेचा जाता है, जिससे करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि इस अवैध कारोबार के चलते यमुना नदी में मछलियों की प्रजातियां तेजी से समाप्त होती जा रही हैं। क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि कुछ स्थानों पर विस्फोटक सामग्री और अन्य प्रतिबंधित तरीकों से भी मछलियों का शिकार किया जाता है, जो न सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि पर्यावरण और जलीय जीवन के लिए भी बेहद घातक साबित हो रहा है। लगातार हो रहे अवैध मत्स्य आखेट से नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगडऩे लगा है और जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि यमुना नदी में हो रहे अवैध मत्स्य आखेट की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी ठेकेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए तथा प्रतिबंधित जालों और अवैध तरीकों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
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