सरगुजा, 03 मई (आरएनएस)। सरगुजा में बीते 30 दिनों के भीतर ऐसा ऑपरेशन चला जिसने गुमशुदगी के आंकड़ों को सीधे राहत की खबर में बदल दिया, 1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक चले ‘ऑपरेशन तलाशÓ और ‘अभियान मुस्कानÓ के तहत पुलिस ने 114 गुम इंसानों को ढूंढ निकालकर उनके परिजनों को सौंप दिया, इस बड़े अभियान की कमान डीआईजी एवं एसएसपी राजेश कुमार अग्रवाल के निर्देशन में संभाली गई जहां हर थाना स्तर पर टीमों को अलर्ट मोड में रखा गया, हर केस को गंभीरता से लिया गया, परिजनों से लगातार संपर्क किया गया और तकनीकी संसाधनों का आक्रामक इस्तेमाल किया गया, नतीजा यह रहा कि जिन घरों में उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी वहां फिर से खुशियां लौट आईं, इस पूरी कार्रवाई में 80 महिलाएं, 20 पुरुष और 14 नाबालिग शामिल हैं जिनमें 2 बालक और 12 बालिकाएं हैं, पुलिस ने सभी को सुरक्षित बरामद कर परिवारों के सुपुर्द किया, सबसे ज्यादा सफलता थाना गांधीनगर पुलिस टीम के हिस्से आई जिसने अकेले 25 गुम इंसानों को खोज निकाला, वहीं अंबिकापुर कोतवाली ने 12, लखनपुर ने 11, उदयपुर ने 10, दरिमा ने 13, लुंड्रा और मणिपुर ने 7-7, बतौली और धौरपुर ने 4-4, कमलेश्वरपुर ने 4 और सीतापुर ने 3 गुमशुदाओं को बरामद किया, नाबालिगों की बात करें तो कोतवाली ने 5 बालिकाएं, गांधीनगर ने 4, उदयपुर, बतौली, धौरपुर, मणिपुर और कमलेश्वरपुर ने 1-1 बालिका को खोजकर सुरक्षित लौटाया, इस अभियान में पुलिस ने केवल औपचारिकता नहीं निभाई बल्कि हर केस को मिशन की तरह लिया, मुखबिर, लोकेशन ट्रैकिंग, कॉल डिटेल और फील्ड वर्क का कॉम्बिनेशन इस्तेमाल किया गया, यही वजह रही कि एक महीने के भीतर इतनी बड़ी संख्या में गुम इंसानों की दस्तयाबी संभव हो पाई, यह ऑपरेशन पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देश पर शुरू हुआ था और सरगुजा पुलिस ने इसे जमीनी स्तर पर पूरी ताकत से लागू किया, नतीजा अब सबके सामने है—114 परिवारों की चिंता खत्म, 114 जिंदगियां फिर अपने घरों तक पहुंचीं, बहरहाल, यह अभियान सिर्फ आंकड़ा नहीं बल्कि भरोसे की वापसी है, यह बताता है कि जब सिस्टम एक्टिव मोड में हो तो ‘गुमशुदगीÓ भी ‘मुस्कानÓ में बदल सकती है।
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