बिलासपुर, 03 अप्रैल (आरएनएस)। बिलासपुर में मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में चार अधिवक्ताओं को बड़ा झटका लगा है। विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटी) की अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को गंभीर आरोपों का हवाला देते हुए खारिज कर दिया।
मामला थाना सिविल लाइन क्षेत्र का है, जहां आरोप है कि अधिवक्ताओं ने फर्जी शपथपत्र और दस्तावेजों के आधार पर मुआवजा दावा प्रस्तुत किया। इस प्रकरण में पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है।
जानकारी के अनुसार, आरोपियों में एन.पी. चंद्रवंशी (62), भगवती कश्यप (50), शुभम चंद्रवंशी (32) और सूरज वस्त्रकार (29) शामिल हैं, जिन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी।
जांच के दौरान मामले में बड़ा खुलासा हुआ, जब संबंधित महिला ने स्वयं अदालत में उपस्थित होकर स्पष्ट किया कि वह मृतक की पत्नी नहीं, बल्कि उसके भाई की पत्नी है। उसने यह भी बताया कि उसने किसी प्रकार का शपथपत्र नहीं दिया और न ही किसी अधिवक्ता को अधिकृत किया। एक अन्य महिला ने भी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर से इनकार किया है।
इस खुलासे के बाद न्यायालय ने थाना सिविल लाइन को आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज करने के निर्देश दिए। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि कानून की जानकारी होने के बावजूद अधिवक्ताओं द्वारा ऐसा कृत्य किया जाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। वहीं बचाव पक्ष ने दावा किया कि कार्य उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर किया गया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं और आरोपियों को अग्रिम जमानत देने योग्य नहीं पाया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की प्रकृति को देखते हुए किसी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती।
पुलिस ने इस मामले में कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है, जिनमें धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेजों का उपयोग, झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करना और न्यायिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ जैसे आरोप शामिल हैं। अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद अब आरोपियों की गिरफ्तारी कभी भी हो सकती है।
००००
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

