डॉ रामेश्वर उरांव बोले: निजी विद्यालयों की समस्याओं पर शिक्षा सचिव से करेंगे बात;जरुरत हुई तो मुख्यमंत्री से भी करेंगे बात*
प्राइवेट स्कूलों को भी सुविधाएं देना सरकार की जिम्मेदारी: डॉ रामेश्वर उरांव
निजी विद्यालयों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता : डॉ रामेश्वर उरांव
सरकारी और निजी स्कूल दोनों शिक्षा व्यवस्था के अहम स्तंभ: डॉ रामेश्वर उरांव
डॉ रामेश्वर उरांव मुख्य अतिथि के रूप में पासवा बैठक में हुए शामिल
शिक्षा और बच्चों के कल्याण पर पासवा ने बनाई नई
यू-डाइस, मान्यता के नाम पर परेशान किया तो होगा होगा आंदोलन
रांची 3 मई (आरएनएस)। पब्लिक स्कूल्स एण्ड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन (पासवा) के जिला अध्यक्षों एवं प्रदेश पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक राजकीय अतिथि शाला मोरहाबादी में राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में संगठन की मजबूती, निजी विद्यालयों की समस्याओं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान आगामी कार्यक्रमों एवं संगठन विस्तार को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ रामेश्वर उरांव उपस्थित रहे। जबकि विशिष्ट अतिथि के रुप में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रवीण चन्द्रा उपस्थित थे।डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि निजी विद्यालयों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे को लेकर वे जल्द ही शिक्षा सचिव से मुलाकात करेंगे तथा सरकार स्तर पर समाधान सुनिश्चित कराने का प्रयास करेंगे।
उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद प्रकार शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रारंभ से मिश्रित व्यवस्था रही है, जहां सरकारी विद्यालयों के साथ-साथ निजी विद्यालयों ने भी शिक्षा के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में कई बार शिक्षकों को शिक्षण कार्य के अतिरिक्त अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगा दिया जाता है, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित होती है। यही कारण है कि समय के साथ लोगों का भरोसा निजी विद्यालयों की ओर बढ़ा है। आज चपरासी से लेकर सरकारी कर्मचारी एवं अधिकारियों तक के बच्चे निजी विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि निजी विद्यालयों को लेकर जो शिकायतें आती हैं, उनमें कुछ बातें सही भी हो सकती हैं, लेकिन सरकार की जिम्मेदारी केवल आलोचना करना नहीं, बल्कि व्यवस्था को बेहतर बनाना भी है। निजी विद्यालयों को पूरी तरह संचालकों के भरोसे छोड़ देना उचित नहीं है। सरकार को उनके विकास, नियमन और सहयोग—तीनों पर समान रूप से ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि जिस प्रकार सरकारी विद्यालयों पर खर्च किया जाता है, उसी तरह निजी विद्यालयों में पढऩे वाले बच्चों के हितों पर भी सरकार को विचार करना चाहिए। निजी विद्यालयों को भी बुनियादी सुविधाएं, सहयोग और सकारात्मक माहौल मिलना चाहिए।
डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि जब निजी विद्यालयों और कॉलेजों में पढ़कर बच्चे राज्य और देश का नाम रोशन करते हैं, तो यह सरकार के लिए भी गर्व की बात होती है। ऐसे में इन विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कार्य करना सरकार का भी कर्तव्य है। आलोक कुमार दूबे ने कहा कि पासवा लगातार शिक्षा, बच्चों के अधिकार एवं निजी विद्यालयों के हित में कार्य करता रहेगा। संगठन को और मजबूत बनाने के लिए जिला स्तर पर सक्रियता बढ़ाई जाएगी।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि निजी विद्यालयों को अनावश्यक रूप से प्रताडि़त करना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिक्षा संस्थानों को डराने-धमकाने की नीति तुरंत बंद होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि निजी विद्यालय राज्य की शिक्षा व्यवस्था का मजबूत स्तंभ हैं। लाखों बच्चों का भविष्य संवारने वाले संस्थानों को सम्मान देने के बजाय दबाव बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है।उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यू-डाइस कोड, मान्यता, नवीकरण और एडमिशन के नाम पर विद्यालयों को परेशान किया गया, तो पब्लिक स्कूल्स एण्ड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन (पासवा) सड़क से सदन तक आंदोलन करने को बाध्य होगा।उन्होंने कहा कि अधिकारी निजी विद्यालयों को सहयोग करें, शोषण नहीं। शिक्षा के मंदिरों को कार्यालयी जटिलताओं में उलझाना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि पासवा हर जिले में संघर्ष समिति बनाएगा और जहां भी विद्यालयों का उत्पीडऩ होगा, वहां संगठन मजबूती से आवाज उठाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निजी विद्यालयों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन, धरना और जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। बैठक में विद्यालय संचालकों ने यू-डाइस कोड, मान्यता संबंधी जटिलताओं, अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं तथा संवादहीनता की समस्याओं को रखा। साथ ही निजी विद्यालयों को डराने-धमकाने, एडमिशन को लेकर दबाव बनाने तथा अनावश्यक हस्तक्षेप जैसे मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा हुई। विद्यालय प्रतिनिधियों ने कहा कि निजी विद्यालय शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, ऐसे में उन्हें सहयोग देने के बजाय परेशान किया जाना उचित नहीं है।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि निजी विद्यालय केवल शिक्षा देने का कार्य ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि हजारों शिक्षकों एवं कर्मचारियों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं। ऐसे में इन संस्थानों के समक्ष उत्पन्न समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। विद्यालय प्रतिनिधियों ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप निजी विद्यालय लगातार आधुनिक संसाधनों, तकनीकी शिक्षा एवं बेहतर शिक्षण व्यवस्था को अपनाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक बाधाओं के कारण कई योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल संबंधित विभागीय अधिकारियों से मुलाकात कर निजी विद्यालयों की समस्याओं से अवगत कराएगा तथा समाधान की मांग करेगा। संगठन ने सभी विद्यालय संचालकों से एकजुट होकर शिक्षा हित में कार्य करने का आह्वान किया। बैठक में लाल किशोर नाथ शाहदेव, डॉ राजेश गुप्ता (छोटू), नीरज सहाय, मिंकू कुमार, डॉ सुषमा केरकेट्टा, मेघाली सेनगुप्ता, पूजा कुमारी, गीता एक्का, संजीव कुमार सिंह, सुभाष उपाध्याय, रमन झा, मेंहुल दूबे, मो जिन्ना, अशोक कुमार पासवान, विकास भार्गव, राकेश कुमार सिंह, अमित कुमार मिश्रा, बरह्मदेव दांगी, छोटू साव, एस एन पाठक, संजय प्रसाद, अरबाज़ रहमान, डॉ तनवीर अहमद, रूपेश कुमार, मनोज कुमार, निरंजन पांडे, योगेंद्र योगी, प्रमोद रंजन, राजा खान, रोहित सिन्हा, एसके भारती, नीरज कुमार, प्रवीण चंद्रा, रिज़वाना परवीन, आकाश नंदू, नौशाद मुख्य रुप से उपस्थित थे।
कार्यक्रम का समापन संगठन की एकजुटता एवं शिक्षा हित में निरंतर कार्य करने के संकल्प के साथ हुआ।
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