नई दिल्ली,04 मई (आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रेणुकास्वामी मर्डर केस में कन्नड़ एक्टर दर्शन और दूसरों के खिलाफ ट्रायल कर रही बेंगलुरु कोर्ट से कहा कि वह कार्रवाई की प्रगति विवरण में एक स्टेटस रिपोर्ट (स्थिति रिपोर्ट) जमा करे, जिसमें उन गवाहों की संख्या बताई जाए जिनसे पूछताछ की गई, जिनकी सुनवाई होनी बाकी है, और केस पूरा होने में लगने वाला अनुमानित समय शामिल हो.
यह मामला जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच के सामने सुनवाई के लिए आया. बेंच ने दर्शन की उस रिट याचिका पर नोटिस जारी किया जिसमें केस में बेल की मांग की गई थी.
सुनवाई के दौरान, दर्शन की ओर से पेश सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि जब से सुप्रीम कोर्ट ने 14 अगस्त, 2025 को बेल खारिज की है, तब से याचिकाकर्ता ने कुल मिलाकर एक साल जेल में बिताया है.
बेंच के सामने यह दलील दी गई कि उन्हें वे बुनियादी सुविधाएं नहीं दी गईं जो एक अंडरट्रायल कैदी को दी जाती हैं. रोहतगी ने कहा कि उनके मुवक्किल को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की वजह से क्वारंटाइन सेल में रखा गया था और उन्होंने कहा, मुझे बेसिक सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं.
दलीलें सुनने के बाद, बेंच ने कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी किया. बेंच ने अपनी रजिस्ट्री को सेशंस केस के स्टेटस के बारे में बेंगलुरु कोर्ट से एक रिपोर्ट मांगने का भी निर्देश दिया.
बेंच ने कहा, हम जानना चाहते हैं कि कितने गवाहों से पूछताछ हो चुकी है और कितनों से पूछताछ होनी बाकी है. हम यह भी जानना चाहेंगे कि ट्रायल पूरा होने में कितना समय लगेगा, और क्या एक अंडरट्रायल कैदी को दी जाने वाली बेसिक सुविधाएं उसे मिल रही हैं या नहीं.
बेंच ने एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी और उसके बाद मामले की आगे की सुनवाई तय की. दर्शन की याचिका में कहा गया है कि अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से लगभग आठ महीने बीत चुके हैं, इस दौरान याचिकाकर्ता न्यायिक हिरासत में रहा है. वह अब तक लगभग एक साल की कुल अवधि के लिए हिरासत में रहा है.
याचिका में कहा गया है कि यह सच है कि 262 गवाह हैं, जिनमें से केवल 10 से पूछताछ हुई है. याचिका में कहा गया कि यह साफ है कि ट्रायल पूरा होने में बहुत लंबा समय लगेगा और याचिकाकर्ता को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ेगा. ऐसे में उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता, गरिमा और बराबरी, और आर्टिकल 14 और आर्टिकल 21 के तहत उसके मौलिक अधिकार छीन लिए जाएंगे.
याचिका में कहा गया है कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द कर दी है, इसलिए निचली अदालतें उसकी जमानत अर्जी पर विचार नहीं करेंगी, जिससे उसे यह रिट याचिका दायर करके इस अदालत के असाधारण अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ा.
याचिका में आगे कहा गया कि चूंकि मुकदमा लंबा चलने की संभावना है, इसलिए पूरा मुकदमा लंबित रहने तक उसकी जेल में रहने से उसकी आजीविका और उसके व्यापार और पेशे को जारी रखने के अधिकार को अपूरणीय क्षति होगी. उसकी याचिका में यह भी दावा किया गया कि उसकी जमानत रद्द होने के बाद, जेल अधिकारियों ने उसके साथ कठोर और अमानवीय व्यवहार किया. दर्शन को पहली बार 11 जून, 2024 को चित्रदुर्ग के 33 वर्षीय रेणुकास्वामी की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था.
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