दुर्ग, 05 मई (आरएनएस)। एक सिम कार्डज् और उसी से बुना गया धोखाधड़ी का ऐसा जाल, जिसने कई लोगों की पहचान को हथियार बना दियाज् दुर्ग के नेवई इलाके में जब यह राज खुला तो मामला सिर्फ एक नंबर का नहीं बल्कि पूरे संगठित नेटवर्क का निकला, जहां एक मासूम भरोसा सबसे बड़ा हथियार बन गयाज् कहानी शुरू होती है 19 वर्षीय आयुष ताम्रकार से, जिसे उसके ही परिचित ने विश्वास में लेकर मोबाइल दुकान तक पहुंचाया, सिम उसके नाम से निकलवाया और फिर वही सिम उसकी जिंदगी से गायब हो गयाज् लेकिन असली खेल तो इसके बाद शुरू हुआज् जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि आरोपी टी. भार्गव राव, उम्र 20 वर्ष, निवासी लक्ष्मीनगर रिसाली भिलाई ने उस सिम को अपने पास रखकर कमीशन के खेल में उतार दिया, और फिर वह सिम एक हाथ से दूसरे हाथ, और दूसरे से तीसरे हाथ तक ज्यादा कीमत में बिकता गयाज् धीरे-धीरे ये एक चेन बन गई, जहां हर कड़ी मुनाफा कमा रही थी और उसी सिम के जरिए अवैध आर्थिक लेन-देन को अंजाम दिया जा रहा थाज् जैसे ही नेवई पुलिस को इस पूरे खेल की भनक लगी, मामला गंभीर हो गयाज् तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों की परतें खुलने लगीं और फिर शुरू हुआ पुलिस का सटीक ऑपरेशनज् टीम ने एक-एक कर कडिय़ों को जोड़ा और आखिरकार चार चेहरे सामने आए—ज्ञानेश मंडावी उम्र 19 वर्ष निवासी इंदिरानगर उतई, हर्षित साहू उम्र 21 वर्ष निवासी रिसाली गांव नेवई, दीपक प्रजापति उम्र 20 वर्ष निवासी खुर्सीपार भिलाईज् और इस पूरे खेल का सूत्रधार टी. भार्गव रावज् पुलिस ने घेराबंदी कर सभी को दबोचा और उनके कब्जे से तीन मोबाइल फोन बरामद किए, जो इस डिजिटल अपराध के मूक गवाह थेज् पूछताछ में जो सामने आया, उसने साफ कर दिया कि यह कोई छोटा खेल नहीं बल्कि सुनियोजित धोखाधड़ी का नेटवर्क था, जहां पहचान बेची जा रही थी और पैसे कमाए जा रहे थेज् हालांकि कहानी में एक ट्विस्ट अभी बाकी है—इस पूरे खेल का एक और किरदार फैजान कुरैशी अभी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही हैज् नेवई थाना में अपराध क्रमांक 277/2026 के तहत बीएनएस की धाराओं में मामला दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया हैज् इस पूरी कार्रवाई में उप निरीक्षक सुरेन्द्र तारम और उनकी टीम की तेजी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि डिजिटल अपराध चाहे जितना चालाक क्यों न हो, कानून की पकड़ उससे तेज होती हैज् बहरहाल, ये मामला सिर्फ एक धोखाधड़ी नहीं बल्कि एक सख्त चेतावनी है—अपनी पहचान किसी और को सौंपना सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि खुद को अपराध के जाल में धकेलना है।
0
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

