0 पवन पांडे के नेतृत्व में मिल रहा नया मंच
रामानुजगंज, 05 मई (आरएनएस)। रामानुजगंज नगर सहित बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में पिछले 15 वर्षों से सांस्कृतिक चेतना की एक सशक्त धारा प्रवाहित हो रही है। यह कार्य संस्कार भारती के माध्यम से निरंतर किया जा रहा है, जिसका नेतृत्व पवन पांडे कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में जिले की विलुप्त होती लोक कला, परंपराएं और सांस्कृतिक प्रतिभाएं न केवल संरक्षित हो रही हैं, बल्कि उन्हें एक नई पहचान भी मिल रही है।
संस्कार भारती द्वारा जिले के विभिन्न विकासखंडों में समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाता रहा है। इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य स्थानीय लोक कलाकारों को मंच प्रदान करना और उनकी प्रतिभा को निखारना है। विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में छिपी हुई कलाओं—जैसे लोक नृत्य, गीत, पारंपरिक वाद्य कला और चित्रकला—को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है।
पवन पांडे का मानना है कि बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, बल्कि आवश्यकता है उन्हें सही दिशा, प्रशिक्षण और अवसर देने की। वे बताते हैं कि जब कलाकारों को उचित मंच मिलता है, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपनी कला को और बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर पाते हैं।
इन प्रयासों के चलते कई स्थानीय कलाकार अब जिले से बाहर भी अपनी पहचान बना रहे हैं। संस्कार भारती न केवल उन्हें मंच प्रदान कर रही है, बल्कि उनके भीतर छिपी कला को निखारने के लिए विशेषज्ञों के माध्यम से प्रशिक्षण भी दिला रही है।
गौरतलब है कि बदलते समय में जहां पारंपरिक लोक कलाएं धीरे-धीरे विलुप्त हो रही हैं, वहीं संस्कार भारती का यह प्रयास सांस्कृतिक विरासत को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। पवन पांडे के नेतृत्व में यह अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में जिले की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
स्थानीय लोगों और कलाकारों ने भी इस पहल की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि भविष्य में ऐसे प्रयास और व्यापक स्तर पर किए जाएंगे, ताकि हर प्रतिभावान कलाकार को उसका उचित स्थान और सम्मान मिल सके।
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