रायपुर, 05 मई (आरएनएस)। व्हाट्सएप पर आया एक सरकारी नियुक्ति आदेश और उसी के साथ शुरू हुआ करोड़ों की ठगी का खेल, जहां हर लाइन में नौकरी का सपना था और हर साइन में भरोसे का जाल, रायपुर ग्रामीण में जब इस फर्जी आदेश की परत खुली तो पता चला कि यह सिर्फ एक मैसेज नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश थी, जिसमें मंत्रालय के नाम, सचिव और उप-सचिव के डिजिटल हस्ताक्षर तक का इस्तेमाल कर लोगों को फंसाया गया, कहानी की शुरुआत होती है 24 अप्रैल 2026 से, जब सामान्य प्रशासन विभाग के राजपाल बघेल ने थाना राखी में रिपोर्ट दर्ज कराई कि सोशल मीडिया पर एक फर्जी आदेश वायरल हो रहा है, जिसमें कई विभागों में भर्ती का दावा किया गया था और उसी के बहाने लोगों से पैसे ऐंठे जा रहे थे, जैसे ही मामला सामने आया, पुलिस हरकत में आई और एक विशेष टीम बनाई गई, जिसने डिजिटल दुनिया के अंधेरे को खंगालना शुरू किया, मोबाइल नंबर, व्हाट्सएप ट्रेल और इलेक्ट्रॉनिक सबूत एक-एक कर खुलने लगे और फिर एक नाम सामने आया राजेश शर्मा उर्फ राजू, पुलिस की टीम सीधे राजनांदगांव के डोंगरगढ़ पहुंची, जहां दबिश देकर आरोपी को पकड़ लिया गया, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई, पूछताछ में जो सामने आया उसने पूरे खेल का नक्शा साफ कर दिया, राजेश शर्मा पिता डी.पी. शर्मा उम्र 53 वर्ष निवासी वार्ड नंबर 01 खुटापारा डोंगरगढ़, जो पेशे से शिक्षक है, उसने अपनी आर्थिक तंगी और कर्ज के दबाव में यह जाल बुना और इस खेल में उसका साथी बना मनोज कुमार श्रीवास्तव पिता अमरेश श्रीवास्तव उम्र 52 वर्ष निवासी कुम्हारपारा डोंगरगढ़, जो एक प्राइवेट स्कूल में क्लर्क है, दोनों ने मिलकर कंप्यूटर पर फर्जी नियुक्ति आदेश तैयार किया, उसे व्हाट्सएप पर वायरल किया और फिर शुरू हुआ नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे वसूलने का सिलसिला, जांच में सामने आया कि करीब 34 लोगों को शिकार बनाकर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी की गई, पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कंप्यूटर सेट मॉनिटर, सीपीयू, कीबोर्ड, माउस और प्रिंटर जब्त किया, जो इस डिजिटल अपराध के खामोश गवाह बने, थाना राखी में अपराध क्रमांक 76/2026 के तहत बीएनएस की कई धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 66(डी) में मामला दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया, इस बीच एक और ट्विस्ट सामने आया कि भिलाई की एक महिला से लिए गए 1,90,000 रुपये आरोपियों ने बाद में लौटा दिए थे, जैसे उन्हें आहट मिल गई हो कि खेल अब ज्यादा देर छुप नहीं पाएगा, पुलिस की इस तेज कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि डिजिटल जाल कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून की पकड़ उससे तेज होती है, बहरहाल यह मामला सिर्फ ठगी नहीं बल्कि एक सबक है कि सपनों की नौकरी अगर बहुत आसान लगे तो समझ लीजिए कहीं न कहीं जाल बिछा हुआ है।
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