कोलकाता 5 मई (आरएनएस)। पिछले महीने के अंत में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा बालीगंज स्थित कोलकाता पुलिस के उपायुक्त (डीसी) शांतनु सिन्हा बिस्वास
के आवास पर छापेमारी की थी। उक्त अभियान के बाद से ही डीसी शांतनु सिन्हा बिस्वास लापता हैं। कालीघाट पुलिस स्टेशन के पूर्व कार्यवाहक (ओसी) के रूप में जाने जाने वाले बिस्वास कथित तौर पर औपचारिक समन के बावजूद सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित ईडी के समक्ष पेश नहीं हुए। 4 मई को भाजपा द्वारा टीएमसी सरकार को सत्ता से बेदखल करने के बाद हुए नाटकीय राजनीतिक बदलाव के बाद, सूत्रों का कहना है कि 5 मई की सुबह लापता अधिकारी की तलाश के लिए लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। जांच एजेंसी और अधिकारी के परिवार के बीच विरोधाभासी दावों के कारण यह गुमशुद्धि का मामला रहस्य में डूबा हुआ है। जहां ईडी सूत्रों का कहना है कि बिस्वास अपने घर की शुरुआती तलाशी के दौरान मौजूद नहीं थे, वहीं उनके बेटे सायंतन सिन्हा बिस्वास ने दावा किया कि उनके पिता वास्तव में घर पर थे और दस्तावेजों से संबंधित “सामान्य पूछताछ” में सहयोग कर रहे थे। यहां तक कि घटनास्थल पर पहुंचे वकील प्रोसेनजीत नाग ने भी स्वीकार किया कि उनका डीसी से कोई सीधा संपर्क नहीं था, जिससे उनके सटीक ठिकाने का रहस्य और गहरा गया है। जांच एजेंसियों की खास दिलचस्पी बिस्वास के दक्षिण कोलकाता निवासी सोना पप्पू और बेहाला स्थित प्रमोटर जॉय कामदार से कथित संबंधों में है। जॉय कामदार को तो ईडी ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन सोना पप्पू अभी भी फरार है। ऐसे नाजुक राजनीतिक दौर में एक शीर्ष पुलिस अधिकारी के गायब होने से व्यवस्थागत भ्रष्टाचार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों तथा स्थानीय प्रमोटरों के बीच सांठगांठ की सीमा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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