रामानुजगंज,06 मई (आरएनएस)। जल संसाधन विभाग द्वारा भाला गिरवानी नहर परियोजना के अंतर्गत करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से कंक्रीट नहर का निर्माण कराया जा रहा है। इस परियोजना से भाला और विजयनगर क्षेत्र के सैकड़ों किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है, लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।परियोजना की शुरुआत से ही स्थानीय ग्रामीणों और किसानों ने निर्माण कार्य में अनियमितताओं को लेकर आवाज उठाई थी। उनका आरोप है कि निर्माण के दौरान ही नहर के कई हिस्सों में क्षति दिखाई देने लगी थी, जिससे गुणवत्ता पर संदेह पैदा हुआ। पानी छोड़े जाने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो गई, जब नहर में जगह-जगह दरारें और टूट-फूट सामने आई।स्थानीय किसानों—सरवन सोनी, इफ्तेखार खान, विनीत गुप्ता और रामकुमार धुर्वे—का कहना है कि उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायतें दीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। किसानों के अनुसार, अधिकारी केवल औपचारिकता निभा रहे हैं और समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कंक्रीट नहर निर्माण में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। विशेष रूप से कंक्रीट की सही तरीके से पटाई (क्योरिंग) नहीं की जा रही, जिससे संरचना कमजोर हो रही है। साथ ही, निर्माण में इस्तेमाल हो रही सामग्री की गुणवत्ता भी संदिग्ध बताई जा रही है।निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, विभाग के इंजीनियर नियमित रूप से स्थल का निरीक्षण नहीं करते और ठेकेदार के तकनीकी कर्मचारी भी अक्सर अनुपस्थित रहते हैं, जिससे कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।इस मामले में जल संसाधन विभाग के एसडीओ आशीष जगत ने कहा कि जिन स्थानों पर दरारें आई हैं, उन्हें तुड़वाकर दोबारा निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि संबंधित ठेकेदार को आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं और कार्य में सुधार सुनिश्चित किया जाएगा।ग्रामीणों और किसानों ने मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए, ताकि परियोजना का लाभ सही रूप से किसानों तक पहुंच सके।
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