कुशीनगर, 06 मई (आरएनएस)। जनपद के पडरौना सदर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक, प्रखर समाज सेवी और जनसंघर्ष के प्रतीक डॉ. बी. के. मिश्रा का बुधवार को अपराह्न 1 बजकर 10 मिनट पर निधन हो गया। उनके देहावसान की खबर मिलते ही पूरे कुशीनगर जनपद सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की गहरी लहर दौड़ गई। हर वर्ग, हर तबके के लोग स्तब्ध हैं। राजनीतिक, सामाजिक और आम जनमानस में उनके प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की जा रही है।
डॉ. मिश्रा वर्ष 1980 से 1984 तक पडरौना विधानसभा के विधायक रहे। यह वह दौर था जब राजनीति में जनसेवा का भाव सर्वोपरि हुआ करता था और डॉ. मिश्रा ने इसे न सिर्फ जिया, बल्कि अपने कार्यों से साबित भी किया। अपने कार्यकाल में उन्होंने क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं जैसे सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों के मुद्दों को मजबूती से उठाया। वह सदन में जितने मुखर थे, जमीन पर उतने ही सक्रिय और संवेदनशील।उनकी सबसे बड़ी पहचान रही जनसंघर्ष। चाहे गरीबों के हक की लड़ाई हो, किसानों की समस्याएं हों या फिर सामाजिक अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी हो, डॉ. मिश्रा हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े नजर आते थे। वे सत्ता को सेवा का माध्यम मानते थे, न कि सुविधा का साधन। यही कारण रहा कि राजनीति से दूर होने के बाद भी जनता के दिलों में उनका स्थान कभी कम नहीं हुआ। डॉ. मिश्रा का जीवन सादगी, ईमानदारी और संघर्ष की मिसाल था। उन्होंने कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दे पर की गयी उनकी पहल आज भी लोगों द्वारा याद की जाती हैं। वह उन नेताओं में से थे, जिनके दरवाजे आम आदमी के लिए हमेशा खुले रहते थे।उनके निधन से न केवल एक राजनीतिक व्यक्तित्व का अंत हुआ है, बल्कि एक ऐसे युग का भी समापन हुआ है, जिसमें जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती थी। क्षेत्र के बुजुर्ग आज भी उनके साथ बिताए पलों को याद कर भावुक हो उठते हैं, तो युवा पीढ़ी उन्हें एक प्रेरणा के रूप में देखती है। परिवार में वे अपने पीछे एक पुत्र, बहू, दो पौत्र और एक पौत्री छोड़ गए हैं। उनके जाने से परिवार में शोक और संवेदना का माहौल है।राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों के साथ-साथ आम नागरिकों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे अपूरणीय क्षति बताया है।
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