भोपाल।(आरएनएस)। संभागायुक्त संजीव सिंह ने संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर्स एवं राजस्व अधिकारियों की वीसी (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) के माध्यम से समीक्षा बैठक में निर्देशित किया कि नागरिकों को समय पर न्याय दिलाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सभी राजस्व प्रकरणों का त्वरित, निष्पक्ष एवं न्यायसंगत निराकरण सुनिश्चित किया जाए तथा साथ ही सौ दिवस से अधिक समय से आरसीएमएस पोर्टल पर लंबित शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण सुनिश्चित करें,अन्यथा कोताही बरतने वाले अधिकारियों पर आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
संभागायुक्त संजीव सिंह बुधवार को संभागायुक्त कार्यालय सभाकक्ष से संभाग के समस्त जिलों की राजस्व विभाग की समीक्षा कर रहे थे।
बैठक में कलेक्टर भोपाल प्रियंक मिश्रा, सीहोर कलेक्टर बाला गुरु एस, विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता सहित संभाग के अन्य जिलों के समस्त एसडीएम, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार वर्चुअल माध्यम से सम्मिलित हुए।
संभागायुक्त सिंह ने कहा कि आरसीएमएस पोर्टल पर प्रकरण दर्ज करते समय यह अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक आवेदन उसी उपयुक्त ‘हेडÓ (शीर्ष) में दर्ज हो, जिसमें उसका वैधानिक एवं प्रभावी निराकरण संभव हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्व प्रकरणों में जांच के सभी बिंदु तथ्यपरक, सुस्पष्ट और साक्ष्यों पर आधारित हों। यदि किसी प्रकरण में शिकायत द्वेषपूर्ण या असत्य पाई जाती है, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। वस्तुस्थिति की प्रामाणिक पुष्टि के लिए ‘मिसल बंदोबस्तÓ अभिलेखों का सूक्ष्मता से उपयोग किया जाए,जिनकी प्रतियां पटवारी, जिला एवं कमिश्नर स्तर पर उपलब्ध रहती हैं।
संभागायुक्त ने फील्ड स्तर पर सुधार के कड़े निर्देश देते हुए कहा कि बंटवारे की प्रक्रिया केवल कागजी न रहकर मौके पर टीसीएम (ञ्जष्टरू) मशीन के माध्यम से भौतिक रूप से संपन्न की जाए। बिना पक्षकारों को सुने किसी भी प्रकरण का अंतिम निराकरण न किया जाए—यह सुनिश्चित करना प्रत्येक राजस्व अधिकारी का नैतिक एवं विधिक दायित्व है। सभी अनुविभागीय अधिकारी (स्ष्ठरू) एवं तहसीलदार आगामी एक माह का सुव्यवस्थित प्लान बनाकर सीमांकन के लंबित प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण सुनिश्चित करें। साथ ही, उन्होंने निर्देश दिए कि सभी कलेक्टर एवं अनुविभागीय अधिकारी नियमित रूप से ‘लोअर कोर्टÓ का निरीक्षण करें ताकि लंबित प्रकरणों की स्थिति स्पष्ट हो सके और जारी किए गए आदेशों का मैदानी स्तर पर त्वरित अमल सुनिश्चित कराया जा सके।

