चेन्नई 08 may, (Rns): तमिलनाडु में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी ‘थलपति’ विजय की पार्टी तमिलागा वेत्री कषगम (TVK) के लिए सत्ता की राह अभी आसान नहीं लग रही है। लगातार दूसरे दिन लोकभवन पहुंचे विजय को एक बार फिर निराशा का सामना करना पड़ा है। खबर है कि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें वापस भेज दिया है। राज्यपाल ने विजय से दो टूक शब्दों में कह दिया है कि टीवीके अभी बहुमत से पीछे है, इसलिए सरकार बनाने के दावे से पहले 118 विधायकों के हस्ताक्षर लेकर आएं, उसके बाद ही शपथ ग्रहण हो सकेगा। 234 सीटों वाली विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद टीवीके अपने दम पर जादुई आंकड़े से दूर है।
कांग्रेस के ‘बूस्टर’ के बाद भी जादुई आंकड़े की दरकार
टीवीके की प्रभावी संख्या फिलहाल 107 है, क्योंकि विजय को अपनी जीती हुई दो में से एक सीट छोड़नी होगी। हालांकि, द्रमुक (DMK) का साथ छोड़कर कांग्रेस ने अपने 5 विधायकों का समर्थन विजय को दे दिया है, जिससे उनका आंकड़ा ऊपर चढ़ गया है। इस सियासी रस्साकशी के बीच, वीसीके (VCK) प्रमुख थिरुमवालवन ने राज्यपाल से अपील की है कि सबसे बड़ी पार्टी के नेता होने के नाते विजय को सरकार बनाने का न्योता दिया जाए और उन्हें विधानसभा में फ्लोर टेस्ट (बहुमत साबित करने) का मौका मिले। बुधवार को भी विजय ने विधायकों के समर्थन के साथ राज्यपाल से मुलाकात की थी, लेकिन राज्यपाल सीधे तौर पर 118 विधायकों के हस्ताक्षर वाली सूची की मांग पर अड़े हैं।
दशकों बाद तमिलनाडु की राजनीति में आया ऐसा सियासी भूचाल
तमिलनाडु के इतिहास में चुनाव के बाद इस तरह का राजनीतिक उलटफेर और गठबंधन का ऐसा स्वरूप पहली बार देखने को मिल रहा है। कांग्रेस के समर्थन से न केवल टीवीके को बड़ी ताकत मिली है, बल्कि 1967 के बाद पहली बार कांग्रेस को राज्य मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना भी पक्की हो गई है। इस अवसरवादी गठबंधन से द्रमुक खेमे में भारी बौखलाहट और नाराजगी है। वहीं, वीसीके और दो वामपंथी दलों (भाकपा और माकपा) के कुल छह विधायक भी द्रमुक का साथ छोड़कर टीवीके के पाले में आ सकते हैं, जिस पर शुक्रवार तक फैसला होने की उम्मीद है। उधर, टीवीके नेता वी. एस. बाबू ने विश्वास जताते हुए कहा है कि जल्द ही शपथ ग्रहण होगा और आगे की रणनीति भी साफ हो जाएगी।

