जोहान्सबर्ग ,08 मई ,। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे भयंकर युद्ध का असर अब केवल कच्चे तेल के बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने सोने की चमक को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। दक्षिण अफ्रीका की प्रमुख गोल्ड माइनिंग कंपनी ‘गोल्ड फील्ड्सÓ ने गुरुवार को बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण खदानों से पीली धातु निकालने की लागत में भारी इजाफा हो रहा है। युद्ध के चलते माइनिंग में इस्तेमाल होने वाले ईंधन और विस्फोटकों के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे इस दिग्गज अफ्रीकी कंपनी का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों का माइनिंग पर सीधा प्रहार
कंपनी ने अपनी हालिया तिमाही अपडेट में इस संकट को लेकर चिंता जताई है। गोल्ड फील्ड्स के मुताबिक, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास भी बनी रहती है, तो पोर्टफोलियो स्तर पर माइनिंग की लागत में 40 से 50 डॉलर प्रति औंस तक का भारी इजाफा हो सकता है। दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ घाना, ऑस्ट्रेलिया, चिली और पेरू में कारोबार करने वाली इस कंपनी का कहना है कि उनकी लागत में सबसे बड़ी बढ़ोतरी डीजल के मोर्चे पर हुई है, जिसके दाम 70 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। इसके अलावा माल ढुलाई की लागत में 40 प्रतिशत और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (रुहृत्र) की कीमतों में 30 प्रतिशत का तगड़ा उछाल आया है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया जैसी दूरदराज की साइट्स पर ऊर्जा के लिए एलएनजी का ही सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है।
विस्फोटकों से लेकर साइनाइड तक, हर चीज हुई महंगी
माइनिंग के लिए जरूरी रसायन भी महंगाई की इस मार से अछूते नहीं हैं। सोने की प्रोसेसिंग में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण रसायन साइनाइड और खदानों के लिए जरूरी विस्फोटकों की कीमतों में भी 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद मिडिल ईस्ट में यह युद्ध शुरू हुआ था। इसके जवाब में ईरान ने ऊर्जा व्यापार के सबसे अहम मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेटÓ को बंद कर दिया था, जिससे अप्रैल के अंत तक कच्चे तेल के दाम 126 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर पर पहुंच गए थे। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शांति समझौते के संकेत दिए जाने के बाद तेल अब 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है, लेकिन संकट और खौफ अभी टला नहीं है।
तमाम चुनौतियों के बावजूद उत्पादन में शानदार उछाल
लागत बढऩे के बावजूद गोल्ड फील्ड्स के उत्पादन के आंकड़े राहत देने वाले हैं। कंपनी ने साल 2026 की पहली तिमाही में 6.33 लाख औंस सोने का शानदार उत्पादन किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 15 प्रतिशत ज्यादा है। इस सफलता का बड़ा श्रेय चिली की सालारेस नॉर्टे खदान को जाता है, जिसने अन्य खदानों में हुए कम उत्पादन की भरपाई कर दी। इसके साथ ही, सोने की कीमतों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जनवरी के अंत में जो सोना 5,595 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर था, वह अब 4,744 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। कंपनी को पूरी उम्मीद है कि वह 2026 में 24 लाख से 26 लाख औंस सोने का कुल उत्पादन करने में सफल रहेगी। लागत को नियंत्रित रखने के लिए कंपनी अपनी खदानों में अधिक ईंधन-कुशल और उच्च क्षमता वाले ढुलाई सिस्टम अपना रही है।
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