कोलकाता 10 मई (आरएनएस)। तृणमूल कांग्रेस ने विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता घोषित किया है। इसी के साथ तृणमूल ने असिमा पात्रा और नयना बंद्योपाध्याय विपक्ष की डिप्टी लीडर बनाया है। इसके अलावा विधायक फिरहाद हकीम विपक्ष के चीफ व्हिप होंगे। हाल ही में हुए चुनावों में भाजपा ने भारी जीत दर्ज की थी और शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। इसके बाद, तृणमूल ने सदन में अपनी भूमिका तय करते हुए इन नामों की घोषणा की है। ऐसे में ममता बनर्जी की भूमिका को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। क्योंकि ममता ने पार्टी की हार के बाद बीजेपी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए विधानसभा में जाने से इनकार कर दिया है। माना जा रहा है कि ममता बनर्जी आने वाले दिनों में भी अपने बयान पर कायम रहेंगी और विधानसभा में नहीं जाएंगीं।
ममता बनर्जी अक्सर चट्टोपाध्याय से राय मशवरा कर पार्टी से जुड़े फैसले लेती आई हैं। ममता को इस बार विपक्ष में बैठकर सरकार के खिलाफ लडऩा है। इसके लिए उन्होंने अपने सबसे अनुभवी नेता को मैदान में उतारा है। 4 मई को आए चुनावी नतीजों में टीएमसी के साथ खुद ममता बनर्जी अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर से शुभेंदु अधिकारी से चुनाव हार गईं। इस हार के बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर सामने आई हैं। इस दौरान ममता ने भाजपा विरोधी ताकतों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा, मैं सभी भाजपा विरोधी ताकतों, छात्र संगठनों और एनजीओ से एक संयुक्त मोर्चा बनाने का आह्वान करती हूं। उन्होंने कहा कि टीएमसी एक बार फिर खड़ी होगी।
ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि भाजपा के खिलाफ इस लड़ाई में वाम मोर्चे का भी स्वागत है। ममता अब हर दिन शाम 4 से 6 बजे तक अपने कार्यालय में उपलब्ध रहेंगी ताकि विपक्षी गठबंधन को मजबूती दी जा सके। हालांकि, माकपा नेता मोहम्मद सलीम ने इस पर तंज कसते हुए रवींद्रनाथ टैगोर की पंक्तियां पढ़ीं, जिसका अर्थ था कि जब सत्ता हाथ से निकल गई, तब ममता को सहयोगियों की याद आ रही है।

