लखनऊ 11 मई (आरएनएस )। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को संस्थागत व्यवस्था, शैक्षणिक गतिविधियों, अनुसंधान, नवाचार, सामाजिक सहभागिता और प्रशासनिक नीतियों में प्रभावी रूप से समाहित करने की दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन इसे केवल एक औपचारिक प्रक्रिया न मानकर सामाजिक उत्तरदायित्व, संस्थागत पारदर्शिता, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में देख रहा है। कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय ने शिक्षा, शोध और सामाजिक सरोकारों को वैश्विक सतत विकास एजेंडा से जोडऩे की व्यापक रणनीति तैयार की है।कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि विश्वविद्यालय में सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में चल रही पहल केवल एक रणनीतिक प्राथमिकता नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और समावेशी विकास जैसे मूल्यों का प्रतिबिंब है। उनका कहना है कि शिक्षा, अनुसंधान और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से ऐसे नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करने की प्रतिबद्धता है, जो स्थानीय से वैश्विक स्तर तक सतत परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त कर सकें। विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को शिक्षित करना नहीं, बल्कि उन्हें सामाजिक रूप से संवेदनशील, पर्यावरण के प्रति जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करना भी है।विश्वविद्यालय ने अपने विजन के अनुरूप यह मान्यता दी है कि उच्च शिक्षण संस्थान केवल डिग्री प्रदान करने के केंद्र नहीं होते, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, नीति निर्माण, ज्ञान सृजन और सतत विकास के वाहक की भूमिका निभाते हैं। इसी सोच के तहत विभिन्न विभागों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय, ग्रामीण विकास और नवाचार जैसे विषयों पर केंद्रित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।सतत विकास लक्ष्य समिति के अध्यक्ष प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने बताया कि विश्वविद्यालय ने एसडीजी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दीर्घकालिक और व्यवस्थित कार्ययोजना तैयार की है। इसके अंतर्गत प्रत्येक विभाग को उसकी विषयगत विशेषज्ञता के अनुरूप एसडीजी आवंटित किए गए हैं। विभागीय स्तर पर शिक्षकों को एसडीजी समन्वयक के रूप में नामित किया गया है, जबकि विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक विभाग से एक छात्र और एक छात्रा को ‘सस्टेनेबल एम्बेसडरÓ नियुक्त किया गया है। ये एम्बेसडर सतत विकास लक्ष्यों के प्रति जागरूकता फैलाने और गतिविधियों में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएंगे।विश्वविद्यालय में एमपीडीसी के माध्यम से एसडीजी आधारित पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, ताकि विद्यार्थियों में इन लक्ष्यों के प्रति बुनियादी समझ विकसित की जा सके। साथ ही प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए एसडीजी लिट्रेसी मॉड्यूल शुरू करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को सतत विकास लक्ष्यों और संकेतकों के अनुरूप मैप किया जा रहा है। इसमें गरीबी उन्मूलन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, स्वच्छ जल, स्वच्छ ऊर्जा, आर्थिक विकास, नवाचार, जलवायु कार्रवाई और सामाजिक न्याय जैसे वैश्विक लक्ष्यों को प्रमुखता दी जा रही है।विश्वविद्यालय में अंतरविषयी और अनुभवात्मक शिक्षण पद्धति को बढ़ावा देते हुए फील्ड विजिट, सामुदायिक परियोजनाएं, केस स्टडी, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, जल प्रबंधन सर्वेक्षण और कृषि आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही कौशल विकास, उद्यमिता और रोजगारोन्मुखी शिक्षा को बढ़ावा देकर विशेष रूप से आर्थिक और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में विश्वविद्यालय गरीबी उन्मूलन, सतत कृषि, जलवायु परिवर्तन, जल संरक्षण, खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, जैव-प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और सामाजिक समावेशन जैसे विषयों पर शोध कार्यों को प्रोत्साहित कर रहा है। विश्वविद्यालय के इनक्यूबेशन और नवाचार केंद्रों के माध्यम से स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है, जहां सौर ऊर्जा, बायोफ्यूल, जल शुद्धिकरण, अपशिष्ट जल उपचार और पर्यावरणीय तकनीकों पर कार्य हो रहा है।लैब टू लैंडÓ दृष्टिकोण अपनाते हुए विश्वविद्यालय शोध को समाज से जोडऩे की दिशा में भी सक्रिय है। किसानों, ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और समाज के वंचित वर्गों के लिए प्रशिक्षण, जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। किसान उत्पादक संगठनों, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन, बाजार संपर्क, पोषण एवं स्वास्थ्य जागरूकता तथा विधिक जागरूकता शिविरों के माध्यम से ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों के विकास को गति देने का प्रयास किया जा रहा है।विश्वविद्यालय परिसर को ‘ग्रीन एवं क्लाइमेट रेजिलिएंट कैंपसÓ के रूप में विकसित करने के लिए वर्षा जल संचयन, जल पुनर्चक्रण, ऊर्जा दक्षता, सौर ऊर्जा, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक मुक्त परिसर और हरित अवसंरचना जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही एसडीजी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष व्याख्यान, छात्र संवाद, पोस्टर एवं रंगोली प्रतियोगिताएं, क्विज, वाद-विवाद, पौधरोपण अभियान, स्वच्छता कार्यक्रम और महिला सशक्तिकरण गतिविधियां नियमित रूप से आयोजित की जा रही हैं।विश्वविद्यालय प्रशासन भविष्य की कार्ययोजना के तहत एक एसडीजी हब स्थापित करने की तैयारी में है, जिसके माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम, शोध गतिविधियां और नवाचार आधारित कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। जल संरक्षण, कार्बन न्यूट्रल परिसर, सौर ऊर्जा विस्तार, कौशल विकास और वैश्विक सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 2015 में प्रस्तुत 17 सतत विकास लक्ष्यों का उद्देश्य वर्ष 2030 तक गरीबी उन्मूलन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है। “लीव नो वन बिहाइंड” की अवधारणा पर आधारित यह वैश्विक एजेंडा समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने की दिशा में कार्य करता है। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय इन्हीं लक्ष्यों को शिक्षा, शोध, नवाचार और सामाजिक सहभागिता के साथ जोड़कर एक समावेशी, आत्मनिर्भर और पर्यावरणीय रूप से संतुलित समाज की स्थापना की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

