राँची 11 मई (आरएनएस)। राँची विश्वविद्यालय के डोरंडा महाविद्यालय के भौतिकी, बीसीए, एम सी ए और बी एससी (आई टी) के संयुक्त तत्वावधान में महान भौतिकविद एलबर्ट आइंस्टीन के स्मृति में भौतिकी के 05 विशिष्ट प्राध्यापकों द्वारा व्याख्यान दिया गया।व्याख्यानमाला की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ राजकुमार शर्मा ने किया।
व्याख्यान माला का शुभारंभ प्रो जगन्नाथन चॉकलिंगम, कुलपति, सरला बिड़ला विश्वविद्यालय, राँची, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के प्राध्यापक प्रो कमल प्रसाद, नालंदा अभियंत्रण महाविद्यालय की प्राध्यापिका डॉ कुमारी ममता, डॉ आर के रॉय एवं प्राचार्य ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया।
प्रथम व्याख्यान एस बी यू के कुलपति सह प्रसिद्ध भौतिकविद प्रोफेसर जगन्नाथन चॉकलिंगम ने रिमोट सेंसिंग तकनीक पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि इस तकनीक से भारत को विश्व गुरु बनाया जा सकता है एवं इसके माध्यम से पूरी दुनिया का नियंत्रण किया जा सकता है। दूसरा व्याख्यान टी एम भागलपुर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रोफेसर कमल प्रसाद ने सर्किट डायग्राम पर विस्तार से बताते हुए कहा कि आज के आधुनिक दुनिया की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने इनोवेटिव विचार देते हुए बताया कि कैसे हम विद्युत उत्पादन कर सकते हैं एवं अपने ऊर्जा का नियंत्रण कर पर्यावरणीय प्रदूषण या ह्यूमिडिटी सेंसर बना सकते हैं।
तीसरे व्याख्यान में बी आई टी, मेसरा के प्राध्यापक डॉ विजय नाथ ने कहा कि चंद्रयान – 3 के लिए चिप डिजाइन किया गया। उन्होंने चिप डिजाइन पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि कैसे चिप डिजाइन किया जा सकता है एवं डिजिटल युग में चिप की जरूरत है। चौथे व्याख्यान में नालंदा अभियंत्रण महाविद्यालय की प्राध्यापिका डॉ कुमारी ममता ने भौतिक लैब प्लेटफॉर्म एवं आभासी लैब प्लेटफॉर्म के अंतर पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि हम कही से भी मोबाइल के माध्यम से आभासी लैब प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रयोग की बारीकियों को सीख सकते हैं। उन्होंने आभासी लैब प्लेटफॉर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यू जी, पी जी और रिसर्च के छात्र छात्राओं के लिए बहुत सारे विकल्प है। उन्होंने आभासी लैब प्लेटफॉर्म के माध्यम से न्यूटन के रिंग प्रयोग को आभासी लैब के माध्यम से करके बताया। पांचवें व्याख्यान में बी आई टी मेसरा के प्राध्यापक डॉ शशांक पुष्कर ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से कितना फायदा एवं हमारे दैनिक जीवन में इसके उपयोग को विस्तार से बताया साथ ही साथ मशीन लर्निंग बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि जो हम सोचते हैं उसे इसके माध्यम से आसानी से अभिव्यक्त किया जा सकता है।
व्याख्यान माला में आर यू के विज्ञान संकाय की अध्यक्ष डॉ बंदना कुमारी, डी एस डब्ल्यू डॉ सुदेश कुमार साहू, कुलानुशासक डॉ एम सी मेहता, डॉ आर के रॉय, डॉ सुनील कुमार सिंह, अध्यक्ष, विश्वविद्यालय भौतिकी विभाग,डॉ राजकुमार सिंह ने भी संबोधित किया। व्याख्यान माला का सफल संचालन स्नातकोत्तर भौतिकी की छात्रा खुशबू एवं मर्सी ने किया।
धन्यवाद ज्ञापन भौतिकी विभागाध्यक्ष सह व्याख्यान माला के संयोजक डॉ ब्रजेश कुमार ने किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ पप्पू कुमार रजक, डॉ लिली, डॉ नूतन लता, डॉ अमरदीप कुमार, डॉ फरजाना, डॉ साधना आदि प्राध्यापकों के साथ ऋचा,शानू प्रिया, दीपक, रवि, नीरज, सोनम, नम्रता, नर्गिस फिरदौस, जानवी, गुड्डू आदि का उल्लेखनीय योगदान रहा. व्याख्यान माला लगभग 7 घंटे से ज्यादा चला और लगभग 200 से ज्यादा छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।
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