हरिद्वार,12 मई (आरएनएस)। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित “राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में इतिहास पुनर्लेखन” विषयक परिसंवाद में मुख्य वक्ता अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली के राष्ट्रीय संगठन मंत्री एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक डॉ. बाल मुकुंद पांडेय ने कहा कि वर्तमान समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन और कार्यों पर आधारित संस्कृत महाकाव्य की 133 सर्गों में रचना की गई है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषा समिति ने 22 लाख पुस्तकों के लेखन का लक्ष्य निर्धारित किया है। साथ ही वर्ष 1978-79 से इतिहास के पुनर्लेखन का कार्य निरंतर जारी है, जो अब एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और उत्तराखंड संस्कृत संकलन समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस परिसंवाद में डॉ. पांडेय ने कहा कि रामायण, महाभारत और पुराण भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक चेतना के मूल आधार हैं। उन्होंने कहा कि भारत को केवल भौगोलिक दृष्टि से देखने पर वह एक देश प्रतीत होता है, लेकिन “भारत माता” कहने मात्र से उसमें संस्कृति, संवेदना और राष्ट्रीय चेतना समाहित होकर राष्ट्र का स्वरूप ग्रहण कर लेती है। डॉ. पांडेय ने इतिहास के संरक्षण, पुनर्लेखन और साक्ष्य-आधारित संकलन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वर्तमान और आने वाली पीढिय़ों को अपने वास्तविक इतिहास से परिचित कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारत की आत्मा है और संस्कृत ग्रंथों में ही भारतीय इतिहास और संस्कृति का प्रामाणिक ज्ञान निहित है।
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